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पापांकुशा एकादशी 2026: पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा क्यों की जाती है? जानें पूजा विधि और महत्व

Sat, 17 Oct 2026 10:08 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

पापांकुशा एकादशी 2026: इस दिन भगवान विष्णु के किस स्वरूप की पूजा की जाती है और क्या है इसका धार्मिक महत्व? जानें पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि, व्रत के नियम और श्रीहरि की आराधना से जुड़ी खास मान्यताएं।

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कब है पापांकुशा एकादशी - फोटो : अमर उजाला

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के लिए विशेष मानी जाती है। सालभर में आने वाली सभी एकादशियों का अपना धार्मिक महत्व है। इन्हीं में से एक है पापांकुशा एकादशी, जो आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत करने और श्रद्धापूर्वक श्री हरि की उपासना करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने की कामना की जाती है। वर्ष 2026 में पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्तूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और एकादशी व्रत की कथा सुनते या पढ़ते हैं। कई श्रद्धालु रात में भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करके भी समय बिताते हैं। आइए जानते हैं पापांकुशा एकादशी की सही तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और व्रत से जुड़े जरूरी नियम।

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पापांकुशा एकादशी 2026 कब है - फोटो : adobe stock

पापांकुशा एकादशी 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 अक्तूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और 22 अक्तूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्तूबर, गुरुवार को रखा जाएगा।

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पापांकुशा एकादशी - फोटो : freepik

पापांकुशा एकादशी 2026 के प्रमुख विवरण:

  • व्रत की तारीख: 22 अक्तूबर 2026, गुरुवार
  • एकादशी तिथि शुरू: 21 अक्तूबर को दोपहर 2:11 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 22 अक्तूबर को दोपहर 2:47 बजे
  • व्रत का पारण: 23 अक्तूबर 2026, शुक्रवार

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पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व - फोटो : adobe stock
पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व
पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। धार्मिक मान्यताओं में इसे पापों से मुक्ति, पुण्य अर्जित करने और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने, भगवान विष्णु का स्मरण करने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। पापांकुशा नाम का संबंध पापों पर अंकुश लगाने की धार्मिक अवधारणा से समझा जाता है। इस दिन भक्त अपने आचरण को बेहतर बनाने, मन को शांत रखने और ईश्वर के प्रति समर्पण व्यक्त करने का संकल्प लेते हैं। व्रत के साथ दान-पुण्य, सेवा और संयम को भी महत्व दिया जाता है।
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भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा क्यों होती है? - फोटो : adobe stock

भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा क्यों होती है?
पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। पद्मनाभ भगवान विष्णु का एक प्रसिद्ध नाम है। धार्मिक चित्रण में उन्हें नाभि से निकले कमल के साथ दर्शाया जाता है, जिस पर सृष्टि की रचना से जुड़ी मान्यता आधारित है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाते हैं और फूल, तुलसी दल, फल तथा सात्विक नैवेद्य अर्पित करते हैं। पूजा के दौरान विष्णु मंत्रों का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जा सकता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आराधना भक्तों को आत्मिक शांति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

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पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि - फोटो : amar ujala

पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि

  • सुबह स्नान और व्रत का संकल्प लें: एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत रखने का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल तैयार करें: घर के मंदिर की सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा स्थल पर स्वच्छ आसन बिछाएं और दीपक जलाएं
  • ।भगवान विष्णु को सामग्री अर्पित करें: श्री हरि को पीले फूल, तुलसी दल, फल और सात्विक नैवेद्य अर्पित करें। पूजा सामग्री में अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य चीजें भी शामिल कर सकते हैं।
  • मंत्र जाप और आरती करें: भगवान विष्णु की पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ या भगवान विष्णु की आरती कर सकते हैं।
  • व्रत कथा सुनें या पढ़ें: पापांकुशा एकादशी की कथा का पाठ करें और भगवान विष्णु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करें। इस दिन धार्मिक ग्रंथों का पाठ और भजन-कीर्तन करना भी शुभ माना जाता है।
  • दान-पुण्य करें: अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करें। धार्मिक परंपराओं में एकादशी के दिन सेवा और दान को विशेष महत्व दिया गया है।
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पापांकुशा एकादशी पर व्रत के नियम - फोटो : amarujala
पापांकुशा एकादशी पर व्रत के नियम
  • व्रत रखने वाले भक्त अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या अन्य निर्धारित व्रत-विधि अपना सकते हैं।
  • एकादशी के दिन सामान्यतः चावल, गेहूं और अन्य अनाज से परहेज किया जाता है। व्रत में क्या खाया जा सकता है, इसके लिए अपनी परंपरा का ध्यान रखें।
  • पूजा के दौरान स्वच्छता बनाए रखें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  • क्रोध, कटु वचन और अनावश्यक विवाद से बचते हुए संयम तथा सदाचार का पालन करने का प्रयास करें।
  • रात्रि में भजन-कीर्तन, मंत्र जाप या धार्मिक ग्रंथों का पाठ किया जा सकता है। पूरी रात जागना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है।
  • व्रत के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी इस दिन की परंपराओं में शामिल है।

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पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण कब करें? - फोटो : amarujala

पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण कब करें?
एकादशी व्रत में द्वादशी तिथि पर पारण यानी उपवास खोलने का विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष 2026 में पापांकुशा एकादशी का पारण 23 अक्तूबर, शुक्रवार को किया जाएगा। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार, पारण का समय सुबह लगभग 6 बजकर 27 मिनट से 8 बजकर 42 मिनट तक बताया गया है। पारण से पहले स्नान करके भगवान विष्णु का स्मरण करें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करके व्रत खोलें। व्रत खोलने के लिए हल्का और सात्विक भोजन लेना उचित रहता है। पारण करते समय स्थानीय पंचांग में दिए गए समय और द्वादशी तिथि की स्थिति का ध्यान रखें।

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पापांकुशा एकादशी पर दान का महत्व - फोटो : adobe stock

पापांकुशा एकादशी पर दान का महत्व
एकादशी के दिन पूजा और उपवास के साथ दान-पुण्य को भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, फल, वस्त्र या दैनिक उपयोग की वस्तुएं दे सकते हैं। इस दिन किसी जरूरतमंद की मदद करना और दूसरों के प्रति दयाभाव रखना भी धार्मिक आचरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पापांकुशा एकादशी का संदेश केवल व्रत रखने तक सीमित नहीं है। यह दिन संयम, सेवा, भक्ति और अपने व्यवहार को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी देता है। भगवान विष्णु की पूजा के साथ इन मूल्यों को जीवन में अपनाने का प्रयास करना इस पर्व की भावना के अनुरूप है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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