निर्जला एकादशी को क्यों कहते हैं भीमसेनी एकादशी?
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निर्जला एकादशी को क्यों कहते हैं भीमसेनी एकादशी?
निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इसके पीछे महाभारत काल की एक प्रसिद्ध कथा प्रचलित है। मान्यता है कि पांचों पांडवों में भीम बेहद बलशाली थे, लेकिन उन्हें बहुत अधिक भूख लगती थी। यही कारण था कि उनके लिए अन्य भाइयों की तरह नियमित व्रत रखना आसान नहीं था। एक बार भीम ने अपनी इस समस्या के बारे में महर्षि वेदव्यास को बताया। तब महर्षि ने उन्हें ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक इस एक व्रत को करता है, तो उसे पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है। महर्षि वेदव्यास की बात मानकर भीम ने विधि-विधान से निर्जला एकादशी का व्रत रखा। तभी से इस पावन व्रत को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
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