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Navratri Fasting Rules: नवरात्रि व्रत में दिन में कितनी बार कर सकते हैं भोजन? जानें सही नियम और परंपरा

Thu, 19 Mar 2026 04:22 PM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Navratri Vrat Mein Kitni Baar Kha Sakte Hain: नवरात्रि में नौ दिनों के इस व्रत में खान-पान को लेकर कई नियम बताए गए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि नवरात्रि के व्रत के दौरान दिन में कितनी बार भोजन किया जा सकता है।
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नवरात्रि व्रत में कितनी बार खाना चाहिए? - फोटो : Amar Ujala
Navratri Fasting Rules: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति की आराधना और आध्यात्मिक साधना का विशेष समय माना जाता है। इन नौ दिनों में लोग मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखकर अपने मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास करते हैं। नवरात्रि के व्रत में सामान्य भोजन को त्याग कर नौ दिनों तक संयम, अनुशासन और भक्ति का पालन किया जाता है।

नौ दिनों के इस व्रत में खान-पान को लेकर कई नियम बताए जाते हैं। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि नवरात्रि के व्रत के दौरान दिन में कितनी बार भोजन किया जा सकता है। दरअसल, नवरात्रि व्रत का स्वरूप हर व्यक्ति की श्रद्धा, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए इसमें भोजन के लिए कोई एक कठोर नियम नहीं माना जाता। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं....

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नवरात्रि व्रत में भोजन से जुड़े नियम  - फोटो : Amar Ujala
नवरात्रि व्रत में भोजन से जुड़े नियम 
निर्जला व्रत

कुछ श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान निर्जला व्रत का पालन करते हैं। इस प्रकार के व्रत में व्यक्ति पूरे दिन या कई बार पूरे नौ दिनों तक केवल पानी या फल का ही सेवन करता है। इसे काफी कठिन माना जाता है। इसे आमतौर पर वही लोग करते हैं जो लंबे समय से व्रत-साधना का अभ्यास रखते हैं।
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फलाहार व्रत - फोटो : adobe stock
फलाहार व्रत
कई लोग नवरात्रि में फलाहार व्रत रखते हैं। इसमें दिन में एक या दो बार फल, दूध, दही, मेवा या व्रत में खाए जाने वाले विशेष आहार जैसे कुट्टू या सिंहाड़े के आटे से बनी चीजें खाई जाती हैं। अधिकतर लोग इसी नियम का पालन करते हैं, क्योंकि इससे शरीर को ऊर्जा भी मिलती रहती है और व्रत का नियम भी बना रहता है।

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शाम को एक बार का भोजन - फोटो : Adobe stock
शाम को एक बार का भोजन
कई परिवारों में यह परंपरा भी होती है कि पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को मां दुर्गा की पूजा करने के पश्चात एक बार भोजन किया जाता है। इस भोजन में सामान्य अनाज की जगह व्रत के अनुकूल सामग्री का ही उपयोग किया जाता है।

धार्मिक दृष्टि से नवरात्रि व्रत का मुख्य उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं है। यह मन को संयमित और जागरूक बनाए रखने का समय है। व्रत के माध्यम से व्यक्ति अपने विचारों को सकारात्मक बनाता है, इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की कोशिश करता है और पूरी श्रद्धा के साथ देवी दुर्गा की उपासना करता है।
 
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चैत्र नवरात्रि 2026 - फोटो : adobe
इसलिए हर भक्त अपने स्वास्थ्य, दिनचर्या और आध्यात्मिक क्षमता के अनुसार व्रत का तरीका चुन सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति दिन में एक बार भोजन करता है, फलाहार करता है या केवल फल और पानी का सेवन करता है, तो यह सब उसकी श्रद्धा और सामर्थ्य पर निर्भर करता है।


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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