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शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान, जानें व्रत कथा और उनके नाम का रहस्य

Mon, 12 Oct 2026 10:28 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Navratri Day 2 Maa Brahmacharini Vrat Katha: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप तपस्या, त्याग और संयम का प्रतीक है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी का नाम कैसे पड़ा, भगवान शिव से जुड़ी उनकी पौराणिक कथा और पूजा का महत्व।

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मां ब्रह्मचारिणी व्रत कथा - फोटो : amar ujala

Navratri Day 2 Vrat Katha: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। देवी का यह रूप तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से भक्तों को आत्मबल, धैर्य और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवी दुर्गा के इस स्वरूप का नाम ब्रह्मचारिणी कैसे पड़ा? आइए जानते हैं माता की पौराणिक कथा और पूजा का महत्व।

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नवरात्रि मां ब्रह्मचारिणी  - फोटो : Amar Ujala

मां ब्रह्मचारिणी की व्रत कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था। माता ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि देवर्षि नारद के मार्गदर्शन से उन्होंने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए साधना का मार्ग चुना और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अडिग रहीं। मान्यता है कि माता ने हजारों वर्षों तक कठिन तप किया। तपस्या के शुरुआती चरण में उन्होंने फल और फूल खाकर समय बिताया। इसके बाद लंबे समय तक केवल जमीन पर रहकर साधना की। मौसम की कठिनाइयों की परवाह किए बिना माता अपनी तपस्या में लीन रहीं। धीरे-धीरे उन्होंने भोजन की मात्रा कम कर दी और बाद में केवल बिल्वपत्र खाकर भगवान शिव की आराधना करने लगीं। कथा के अनुसार, तपस्या के अंतिम चरण में माता ने बिल्वपत्र खाना भी छोड़ दिया। इसके बाद वह बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान शिव की साधना करती रहीं। उनकी इस असाधारण तपस्या और अटूट संकल्प को देखकर उन्हें देवी ब्रह्मचारिणी कहा गया। धार्मिक कथाओं में उन्हें अपर्णा नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने तपस्या के दौरान पत्तों का सेवन तक त्याग दिया था।

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माता की कठोर साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। - फोटो : freepik

भगवान शिव ने ली माता की परीक्षा
माता की कठोर साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। पौराणिक कथा के अनुसार, वह ऋषि का रूप धारण करके माता के पास पहुंचे। उन्होंने शिवजी के स्वरूप और उनके जीवन के बारे में कई बातें कहकर माता के संकल्प को डिगाने का प्रयास किया। हालांकि, माता ब्रह्मचारिणी अपने निर्णय पर अटल रहीं और उन्होंने अपनी तपस्या जारी रखी। माता की भक्ति, धैर्य और दृढ़ निश्चय देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने माता को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वचन दिया। इस तरह माता की तपस्या सफल हुई और उनकी मनोकामना पूरी हुई। तभी से देवी के इस स्वरूप को तप और साधना की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

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मां ब्रह्मचारिणी - फोटो : adobe

क्यों पड़ा मां का नाम ब्रह्मचारिणी?
‘ब्रह्मचारिणी’ शब्द का संबंध ब्रह्म के मार्ग पर चलने, तपस्या करने और संयमित जीवन जीने से माना जाता है। देवी का यह स्वरूप सिखाता है कि किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए धैर्य, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति आवश्यक हैं। माता ने भगवान शिव को पाने के लिए जिस तरह कठिन साधना की, वह उनके अटूट संकल्प का उदाहरण है। मां ब्रह्मचारिणी को तप, त्याग, सदाचार और आत्मसंयम की देवी माना जाता है। नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा करके भक्त अपने जीवन में धैर्य, सकारात्मकता और आत्मविश्वास बनाए रखने की कामना करते हैं।

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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व - फोटो : अमर उजाला

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से साधक को मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है। देवी की आराधना व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने और मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देती है। माता का स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए केवल इच्छा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर प्रयास, अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति निष्ठा भी जरूरी है। नवरात्रि के इस पावन दिन भक्त मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान कर सुख, शांति और मंगल की कामना करते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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