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Navratri 2022: शारदीय नवरात्रि पर घर पर कैसे करें पूजा? जानिए पूजा विधि, तिथि, मुहूर्त और पूजा सामग्री

Wed, 21 Sep 2022 07:13 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शारदीय नवरात्रि पर घर पर कैसे करें पूजा - फोटो : अमर उजाला
Shardiya Navratri 2022: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 26 सितंबर से हो रही है। 26 सितंबर, सोमवार से मां आदिशक्ति की उपासना का ये पावन पर्व आरंभ होगा और इसका समापन 05 अक्टूबर को होगा। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में माता रानी के भक्त व्रत रखते हैं और विधि पूर्वक माता की आराधना करते हैं। नवरात्रि के ये पावन दिन शुभ कार्यों के लिए बेहद ही उत्तम माने जाते हैं। इन दिनों कई शुभ कार्य किए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि की नौ तिथियां ऐसी होती हैं, जिसमें बिना मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर सबसे ज्यादा लोग नए बिजनेस की शुरुआत करते हैं या फिर नए घर में प्रवेश करते हैं। नवरात्रि के दौरान घर में पूजा करते हैं तो इसके लिए आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं घर में पूजा करने की विधि और पूजन सामग्री के बारे में। 
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शारदीय नवरात्रि तिथि मुहूर्त  - फोटो : प्रयागराज
शारदीय नवरात्रि तिथि मुहूर्त 
प्रतिपदा तिथि आरंभ- 26 सितंबर 2022,सुबह 03 बजकर 23 मिनट पर 
प्रतिपदा तिथि का समापन - 27 सितम्बर 2022, सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर
 
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शारदीय नवरात्रि पर घर पर कैसे करें पूजा - फोटो : घटस्थापना
घटस्थापना सुबह का मुहूर्त - प्रातः 06.17 से प्रातः 07.55 
कुल अवधि: 01 घण्टा 38 मिनट
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त - प्रातः 11:54 से दोपहर 12:42
कुल अवधि - 48 मिनट

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नवरात्र के लिए पूजा-व्रत सामग्री - फोटो : अमर उजाला
कलश स्थापना के लिए सामग्रियां
कलश, मौली, आम के पत्ते का पल्लव (5 आम के पत्ते की डली), रोली, गंगाजल, सिक्का, गेहूं या अक्षत,
जवार बोने के लिए सामग्री
मिट्टी का बर्तन, शुद्ध मिट्टी, गेहूं या जौ, मिट्टी पर रखने के लिए एक साफ कपड़ा, साफ जल, और कलावा।
अखंड ज्योति जलाने के लिए
पीतल या मिट्टी का दीपक, घी, रूई बत्ती, रोली या सिंदूर, अक्षत
 
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नवरात्र के लिए पूजा-व्रत सामग्री - फोटो : istock
नौ दिन के लिए हवन सामग्री
नवरात्रि पर भक्त पूरे नौ दिन तक हवन करते हैं। इसके लिए हवन कुंड, आम की लकड़ी, काले तिल, रोलीया कुमकुम, अक्षत(चावल), जौ, धूप, पंचमेवा, घी, लोबान, लौंग का जोड़ा, गुग्गल, कमल गट्टा, सुपारी, कपूर, हवन में चढ़ाने के लिए भोग, शुद्ध जल (आमचन के लिए)।

माता रानी के श्रृंगार के लिए सामग्री
नवरात्रि में माता रानी को  श्रृंगार भी अर्पित करना चाहिए। ये  श्रृंगार सामग्री माता रानी के लिए लयनी आवश्यक है।  लाल चुनरी, चूड़ी, इत्र, सिंदूर, महावर, बिंदी, मेहंदी, काजल, बिछिया, माला, पायल, लाली व अन्य श्रृंगार के सामान।
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कलश स्थापना पूजा विधि - फोटो : SELF
कलश स्थापना पूजा विधि
  • शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • पहले दिन घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाकर मुख्य द्वार पर आम और अशोक के पत्ते का तोरण लगाएं। 
  • इसके बाद एक चौकी बिछाकर वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं।
  • उसके बाद रोली और अक्षत से टीकें और फिर वहां माता की प्रतिमा स्थापित करें। 
  • उसके बाद विधिविधान से माता की पूजा करें।
  • उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में कलश रखना चाहिए और माता की चौकी सजानी चाहिए।
  • कलश पर नारियल रखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नारियल का मुख नीचे की तरफ न हो।
  • कलश के मुंह पर चारों तरफ अशोक के पत्ते लगाएं और फिर एक नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा से इसे बांध दें। 
  • अब अम्बे मां का आह्वान करें। इसके बाद दीपक जलाकर पूजा करें।
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