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Navratri 2022: शारदीय नवरात्रि पर देवी का आगमन और विदाई दोनों हाथी पर,जानिए महत्व और कलश स्थापना मुहूर्त

Sat, 17 Sep 2022 06:42 PM IST
विनोद शुक्ला आचार्य पण्डित रामचंद्र शर्मा वैदिक ,मध्यप्रदेश
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navratri 2022: आश्विन माह की नवरात्रि शरद ऋतु में आती है इसलिए इसे शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। - फोटो : istock
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का आरंभ हस्त नक्षत्र,शुक्ल व ब्रह्म योग,कन्या राशि का चन्द्र व कन्या ही राशि के सूर्य में आनन्दादि महायोग श्रीवत्स में 26 सितंबर, सोमवार को हो रहा है। नवरात्रि पूरे 9 दिनों की होगी। इस बार शारदीय नवरात्रि वर्षों बाद मां हाथी पर सवार होकर आ रही हैं और हाथी पर ही सवार हो विदा होंगी। वर्ष में कुल चार नवरात्रियां होती हैं। चैत्र,आषाढ़,आश्विन और माघ माह में। चैत्र व अश्विन माह की नवरात्रि उजागर नवरात्रि व आषाढ माघ माह की नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के नाम से जानी जाती है। आश्विन माह की नवरात्रि शरद ऋतु में आती है इसलिए इसे शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है।
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navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला
शारदीय नवरात्रि का आरंभ 26 सितंबर, सोमवार को घटस्थापना के साथ होगी, वहीं समापन (विसर्जन)5 अक्टूबर, बुधवार को दशहरा पर होगा। नवरात्रि पूरे नौ दिनों के होंगे जिसमे क्रमशः नव दुर्गाओं की पूजा-अर्चना होगी। आश्विन प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर को रात्रि 3 बजकर 08 मिनट तक रहेगी। हस्त नक्षत्र दूसरे दिन प्रातः 6 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। शुक्ल योग के प्रातः 8.03 बजे तक, बाद में ब्रह्मा योग दूसरे दिन प्रातः 6.42 बजे तक पर्व की शोभा बढ़ाएगा। 
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Shardiya Navratri 2022 - फोटो : iStock
सोमवार, 26 सितंबर से नवरात्रि प्रारंभ हो रहे है अतः मां का आगमन हाथी पर होगा जो समृद्धि व खुशहाली का प्रतीक है। माता की विदाई भी हाथी पर होगी (मतांतर से नाव)। देवी भागवत के अनुसार जब मां का आगमन व विदाई हाथी पर होती है देश में खुशहाली का वातावरण निर्मित होता है व पर्याप्त वर्षा से जनता प्रसन्न होती है। 

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navratri 2022 - फोटो : अमर उजाला
बुध प्रधान कन्या राशि का चन्द्रमा व सूर्य तथा बृहस्पति प्रधान गुरु सुख,शांति व समृद्धि के संकेत दे रहे हैं। 26 सितंबर प्रतिपदा सोमवार को माँ शैलपुत्री की पूजा अर्चना के साथ नवरात्रि का श्रीगणेश होगा। 27 सितंबर,द्वितीया को माँ ब्रह्मचारिणी,28 सितंबर ,तृतीया को चन्द्रघंटा,29 सितंबर,चतुर्थी को कुष्मांडा,30 सितंबर,पंचमी  (ललिता पंचमी)को स्कंदमाता ,01 अक्तूबर,षष्ठी को कात्यायनी, 2 अक्तूबर,सप्तमी को कालरात्रि ,3 अक्टूबर,(महाष्टमी) को महागौरी तथा 4 अक्टूबर को महानवमी के साथ शारदीय नवरात्रि का समापन व विसर्जन 5 अक्तूबर को दशहरा प्रातः शुभमुहूर्त में होगा।  
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Shardiya Navratri - फोटो : iStock
नवरात्रि में घटस्थापना,ज्वार रोपण नवदुर्गाओं की क्रमशः पूजन,अर्चन,दुर्गा सप्तशती के सात सौ महामंत्रों से हवन,कन्या पूजन व अपनी अपनी कुल परम्परा के अनुसार कुल देवी पूजन व उपवास का विशेष महत्व है। घट (कलश ) स्थापना प्रतिपदा को प्रातः ब्रह्ममुहूर्त ,चौघड़िया मुहूर्त व अभिजीत मुहूर्त में अपनी अपनी कुल परम्परा अनुसार शुभ रहेगी। नवरात्रि में उपवास का विशेष महत्व है। पूरे नवरात्रि में सम्भव न हो तो अष्टमी अथवा महानवमी को कुलदेवी पूजन के अवसर पर उपवास अवश्य रखना चाहिए। नवरात्रि में प्रतिदिन दुर्गासप्तशती ,नवार्णमन्त्र जप,रामचरित मानस के नवान्हपारायण व रामरक्षा स्तोत्र के पाठ से माँ की कृपा प्राप्त होती है। 
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