चैत्र नवरात्रि शुरू हो चुके है जो 25 मार्च 2018 तक चलेगा। इन 9 दिनों के दौरान माता के भक्त वैष्णों देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। माता का यह प्रसिद्ध मंदिर जम्मू-कश्मीर के त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित है। देवी मां इसी इसी स्थान पर एक गुफा में निवास करती हैं।
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माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जिस रास्ते का इस्तेमाल किया जाता है इसका निर्माण 1977 में किया गया था। जिसका इस्तेमाल आज भी होता है।
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इस प्राचीन गुफा से माता के दर्शन के लिए नियम है कि जब कभी भी दस हजार से कम श्रद्धालु होते है तब इस गुफा के दरवाजे खोल दिया जाता है। आमतौर पर ऐसा शीत काल में दिसंबर और जनवरी महीने में होता है।
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इस गुफा की लंबाई 98 फीट है और इस प्राचीन गुफा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसमें पवित्र गंगा जल बहता रहता है। श्रद्धालु इस जल से पवित्र होकर मां के दरबार में पहुंचते हैं जो एक अद्भुत अनुभव होता है।
वैष्णो देवी की गुफा का संबंध यात्रा मार्ग मे आने वाले एक पड़ाव से भी है जिसे आदि कुंवारी या अर्धकुंवारी कहते हैं। यहां एक अन्य गुफा है जिसे गर्भजून के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि माता यहां 9 महीने तक उसी प्रकार रही थी जैसे एक शिशु माता के गर्भ में 9 महीने तक रहता है। इसलिए यह गुफा गर्भजून कहलाता है।