21 सितंबर से शारदीय नवरात्रि शुरू होने जा रहे हैं। इसमे मां दुर्गा की शक्ति के रुप में उपासना की जाती है। इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रों में पूरे अनुष्ठान के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है। आइए जानते हैं मां के नौ स्वरूपों के बारे में।
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नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता के नौ स्वरूप में शैलपुत्री पहला स्वरूप है। कहा जाता है पर्वतराज हिमालय के घर में पुत्री के रुप में जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
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नवरात्रि के दूसरे दिन माता के ब्रहमचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। देवी ब्रह्राचारिणी तप की शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। इनकी आराधना सें हर मनोकामना पूरी होती है।
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वहीं नवरात्रि के तीसरे दिन देवी दुर्गा के चन्द्रघंटा रुप की आराधना की जाती है। देवी के माथे पर घंटे के आकार का अर्थचंद्र होता है जिसके कारण इन्हें चंद्घटा देवा कहा जाता है। इनकी पूजा करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है।
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नवरात्रि के चौथे दिन देवी कूष्मांडा के रूप की पूजा-आराधना की जाती है। देवी कूष्मांडा को रोगों और पीड़ा को नष्ट करने वाली देवी माना जाता है। इनकी आराधना करने से हमारे शरीर का अनाहत चक्र जागृत होता है।
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पांचवे दिन भगवान स्कंद का माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। इनकी पूजा करने से भक्तों को सुख-वैभव की प्राप्ति होती है।
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नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर आदिशक्ति दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा करते है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां देवी कात्यानी का पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इनकी पूजा करने से सारे पापो का नाश होता है।
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नवरात्रि के सातवें दिन देवी के कालरात्रि स्वरूप का पूजा करते है। मां कालरात्रि काल का नाश करने वाले देवी है। इनकी पूजा से शत्रुओं का नाश होता और यश की प्राप्ति होती है।
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नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां महागौरी का रंग अत्यंत गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। इस दिन कई लोग कन्या पूजन भी करते हैं।
वहीं नौंवे दिन भगवती के देवी सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा कि जाती है। सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्रि में पूजा का अनुष्ठान पूरा हो जाता है। मां सिद्धिदात्री की पूजा से भक्तों के सारे पाप नष्ट हो जाते है और घर में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।