नवरात्रि 21 सितंबर 2017 से शुरू होने वाले हैं। देशभर में लोग नौ दिन तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा आराधना करेंगे और व्रत रखेंगे। अक्सर लोगों में एक बात हमेशा रहती है कि क्या उनकी पूजा सफल हुई, या अधूरी ही रही। अगर आपके मन में भी यही सवाल आता है तो इसे जानने का बेहद आसान तरीका है। नवरात्रि के समय पर जो व्यक्ति व्रत और मां दुर्गा का सप्तशती का पाठ करता है, वे लोग मिट्टी के कुल्हड़ में जौ बो देते हैं और इसी से मालूम चलता है कि उनकी पूजा कितनी सफल रही।
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नवरात्रि
जौ बोए कुल्हड़ में तीसरे दिन अंकुर फट जाता है और इन अंकुरित जौ को बहुत ही शुभ माना जाता है। यदि अंकुरित जौ में काले रंग के अंकुर उगते हैं तो उस वर्ष निर्धनता बढ़ने की संभावना रहती है। धुंए के समान रंग वाले जौ का उगना इस बात की ओर संकेत करता है कि आने वाले समय में परिवार में कलह हो सकती है।
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नवरात्रि
अगर इन समय जौ नहीं उग पाते है तो ये अधिक अशुभ होता है। इसका मतलब जन हानि से होता है। साथ ही कार्यों में बाधा भी आती है। जौ यदि रक्त वर्ण के उगते हैं तो रोग व्याधि या शत्रु का भय रहता है।
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जौ
हरा रंग धन धान्य का सूचक होता है। सफेद रंग का जौ उगना शुभकारी माना जाता है और साधक की अभिष्ट सिद्धि की ओर इंगित करता है।