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Narmada Jayanti 2021: नर्मदा जयंती आज, जानें इस पावन नदी की महिमा और महत्व

Fri, 19 Feb 2021 04:09 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नर्मदा जयंती 2021 - फोटो : pinterest
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आज नर्मदा जयंती मनाई जा रही है। मान्यता है कि आज ही के दिन नर्मदा का अवतरण धरती पर हुआ था। नर्मदा को रेवा नदी के नाम से भी जाना जाता है। यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश में बहती है और अमरकण्टक इसका उद्गम स्थल है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल की सप्तमी तिथि को प्रति वर्ष नर्मदा जयंती मनाई जाती है। 

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हिन्दू संस्कृति में नदियों को बहुत ही अधिक महत्व दिया गया है। उन्हें मां का दर्जा दिया गया है। मान्यता के अनुसार जितना पुण्य पूर्णिमा तिथि को गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान से प्राप्त होता है। उसी के समान पुण्य नर्मदा जयंती पर नर्मदा नदी में स्नान करने पर मिलता है। मां गंगा की तरह ही मां नर्मदा भी मोक्षदायिनी हैं। 

इस तरह मनाई जाती है नर्मदा जयंती 
नर्मदा जयंती के पावन दिन नर्मदा नदी के सभी तटों को सजाया जाता है। नदी के तटों पर हवन किया जाता हैं। इस दिन मां नर्मदा के पूजन के बाद भंडारा का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही सुबह से शाम तक नदी के किनारे कई सारे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संध्या में मां नर्मदा की महाआरती की जाती है। माना जाता है जो भक्त इस दिन मां नर्मदा का पूजन करते हैं उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और रोगों से मुक्ति मिलती है।

नर्मदा जयंती पूजन विधि
नर्मदा जयंती पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के मध्य नर्मदा किसी भी समय स्नान करना शुभ रहता है। इस पावन अवसर पर प्रातः जल्दी उठकर नर्मदा में स्नान करने के बाद सुबह फूल, धूप, अक्षत, कुमकुम, आदि से नर्मदा मां के तट पर पूजन करना चाहिए। इसके साथ ही इस पावन पर्व पर नर्मदा नदी में 11 आटे के दीप जलाकर दीपदान करना शुभ रहता है। इससे आपकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
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नर्मदा नदी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव के द्वारा मां नर्मदा का अवतरण हुआ था। नर्मदा नदी की महिमा का चारो वेदों में वर्णन है। इसके अलावा रामायण और महाभारत में भी इस नदी उल्लेख है। इसी दिव्य नदी के नर्मदेश्वर शिवलिंग विराजमान हैं, जो हिन्दू आस्था का बड़ा केन्द्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी नदी के तट पर साधना करते हुए देवताओं और ऋषि-मुनियों ने सिद्धियां प्राप्त की थी।  
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