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कैसा है नर्क, जानिए नर्क की 18 बातें

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शरीर त्यागने के बाद आत्मा आखिर कहां चली जाती है यह कोई नहीं जानता क्योंकि जो शरीर त्याग करके चला जाता है वह कहां जा रहा है उसे देखने के लिए जीवित व्यक्ति नहीं जा सकता हैं। इसलिए मनुष्य की मृत्यु के बाद आत्मा के आगे का सफर रहस्यों से भरा है। पुराणों के अनुसार आत्मा शरीर त्यागने के बाद उस शरीर के कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नर्क में जाकर अपने कर्मों का फल प्राप्त करता है। हिन्दू धर्म की तरह अन्य धर्मों में भी कुछ इसी तरह की बात की जाती है।
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इस्लाम में भी बताया गया है कि बुरे कर्म करने वाले की आत्मा दोजख में जाती है और अच्छे कर्म करने वाली की आत्मा को जन्नत नसीब होता है। स्वर्ग और नर्क कैसा है और किस कर्म से व्यक्ति को नर्क या स्वर्ग में स्थान मिलता है इसके विषय में हिंदू धर्म कठोपनिषद् और गरूड़ पुराण का हवाला देता है। गरूड़ पुराण के विषय में कहा जाता है कि यह भगवान विष्णु द्वारा पक्षीराज गरूड़ को सुनाया गया संवाद है। जिसमें स्वर्ग, नर्क, मृत्यु, यमलोक और मृत्यु के बाद की स्थितियों का उल्लेख किया गया है।
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पक्षीराज गरूड़ को यममार्ग और नर्क के बारे में बताते हुए भगवान विष्णु गरूड़ पुराण में कहते हैं कि नर्क की कुल संख्या 84 लाख है।

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84 लाख नर्क में 21 प्रमुख  नर्क हैं जो तामिस्र, लोहशंकु, महारौरव, शल्मली, रौरव, कुड्मल, कालसूत्र, पूतिमृत्तिक, संघात, लोहितोद, सविष, संप्रतापन, महानिरय, काकोल, संजीवन, महापथ, अविचि, अंधतामिस्र, कुंभीपाक, संप्रतापन और तपन नाम से जाने जाते हैं।

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भगवान कहते हैं कि इन नर्कों में धर्म से विमुख पापी मनुष्य आते हैं और अपने कर्म के अनुसार युगों तक नर्क भोगते है। इन नर्कों में कई यमदूत रहते हैं जो पापी मनुष्यों को तरह तरह की यातनाएं और कष्ट देते हैं।
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गरूड़ पुराण के अनुसार किसी भी प्राणी को नर्क में भेजने से पहले यमराज और मनुष्यों के कर्मों का लेखा जोखा रखने वाले अधिकारी चित्रगुप्त प्राणी को उसके सारे कार्मों को बताते हैं और प्राणी के पाप और पुण्य फैसला उसी प्रकार सुनाते हैं जिस प्रकार अदालत में अपराधी को न्यायाधीश दंड सुनाते हैं।
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इसके बाद यमराज अपने दूत चंड और प्रचंड को आदेश देते हैं कि प्राणी को किन किन नर्कों में जाना है और फिर यमदूत प्राणी को एक पाश मे बांधकर यमलोक से नर्क लेकर आते हैं।

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यमलोक जहां मृत्युलोक से गए प्राणियों के कर्मों का लेखा जोखा होता है वहां के राजा यमराज हैं। यमराज भगवान शिव और विष्णु के आदेश और नियमों का पालन करते हुए ईश्वरीय नियम के अनुसार हर प्राणी के साथ न्याय करते हैं। यमराज के विषय में पुराण कहता है कि यम कठोर नहीं हैं वह चाहते हैं कि हर प्राणी पुण्य कर्मों से स्वर्ग में स्थान प्राप्त करे। लेकिन जब मनुष्य पाप कर्म के कारण यमलोक पहुंचता है तो यम बहुत क्रोधित होते हैं और अपना उग्र रूप दिखाते हैं।

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इस समय यमराज का शरीर का विस्तार 12 योजन यानी 36 किलोमीटर तक होता है। यमराज का शरीर काजल के समान काला होता और वह अपने वाहन भैंस पर सवार होकर क्रोध से लाल नेत्रों से पापी मनुष्य को देखते हैं। इनकी कई भुजाएं होती है जिनमें यमराज यमदंड और कई अन्य शस्त्र धारण किए रहते हैं। यमराज की तरह चित्रगुप्त भी पापियों को देखकर क्रोध से उग्र रूप धारण कर लेते हैं। जिन्हें देखकर पाप कर्म करके यमलोक पहुंचने वाला प्राणी भय से कांपने लगता है।

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नर्क के बारे में गरूड़ पुराण कहता है कि नर्क के पास एक शाल्मली का वृक्ष है जिसका विस्तार 20 कोस यानी करीब 40 किलोमीटर और ऊंचाई एक योजन यानी करीब 12 किलोमीटर है।

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अग्नि के समान दहकते इस वृक्ष में प्राणी को बांधकर यमदूत प्राणी को भयानक दंड देते हैं। गरूड़ पुराण के अनुसार जब कोई मनुष्य पृथ्वी पर ईश्वर को ध्यान में रखकर अन्न धन दान नहीं करता है और केवल अपने और अपने परिवार के पेट पालने के लिए धन कमाता और संचित करता रहता है तो मृत्यु के बाद उसे नर्क भोगना पड़ता है।

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काम भाव में डूबे स्त्री पुरूष जब ऋतुकाल में और अन्य पुण्य तिथियों के अवसर पर भी कामांध होकर यौनक्रिया करते हैं या परपरूष या स्त्री से संसर्ग करते हैं तो उन्हें नर्क में जाकर अपने पाप कर्मों का दंड भोगना पड़ता है। ऐसे कामांध व्यक्ति तामिस्र, अंधतामिस्र, रौरव नर्क की यातना भोगते हैं।

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अपने सुख और स्वार्थ के लिए जो मनुष्य लोगों से वैर भाव रखता है और कलह करता है उसे भी नर्क जाना पड़ता है। पृथ्वी पर वैर भाव के कारण सबसे अलग-थलग रहने वाला पापी मनुष्य परलोक में भी सबसे अलग ही रहता है जहां उसे यातना से बचाने वाला कोई नहीं होता है।

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जो व्यक्ति कांटों से या कील, पत्थर से रास्ता बंद करते हैं उन्हें भी नर्क में जाना पड़ता है।

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चोरी करके आजीविका चलाने वाला। कूप, तालाब, बावली, मंदिर और लोगों के घरों को नष्ट करने वाले प्राणी को एक-एक करके कई नर्कों में जाकर कष्ट भोगना पड़ता है। इस तरह कई ऐसे कर्म बताए गए हैं जिनसे प्राणी नर्क पहुंचता है।

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कुछ मान्यताएं ऐसी है कि कौए यम के दूत होते हैं जो धरती के प्राणियों की खबर यमराज तक पहुंचाते हैं। लेकिन गरूड़ पुराण इस तरह की बात को स्वीकार नहीं करता। इस पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी के एक पुत्र हैं श्रवण और इनकी पत्नी का नाम है श्रवणी। ये दोनों यमराज के गुप्तचर हैं।

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श्रवण पुरूषों के कर्मों को देखते हैं और श्रवणी महिलाओं पर नजर रखती हैं। इन दोनों के पास ऐसी शक्ति है कि यह कहीं से भी किसी मनुष्य के कर्मों को देख सकते हैं और सुन सकते हैं। यही सारी सूचनाएं यमराज और चित्रगुप्त तक पहुंचाते हैं।
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श्रवण और श्रवणी द्वारा पहुंचायी गई खबरों की साक्षी यानी गवाही के लिए चन्द्रमा, सूर्य, नक्षत्र, संध्या, जल, अंतरात्मा, मन और दिन रात उपस्थित होते हैं। इस तरह यमराज की नजर हर पल हर प्राणी पर रहती है और कर्मों के अनुसार प्राणी स्वर्ग और नर्क में भेजे जाते हैं।
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