ईश्वर का विधान है कि मृत्यु लोक यानी पृथ्वी पर जिसने भी जन्म लिया उसे एक न एक दिन अपने शरीर को त्याग कर वापस परलोक जाना होता है। ईश्वर के इस विधान से स्वयं ईश्वर भी बंधे हैं और जब कभी भी इन्होंने शरीर को धारण कर पृथ्वी पर अवतार लिया इन्इें भी अपना शरीर त्यागकर वापस अपने लोक जाना पड़ा। पुराणों में इस बारे में बहुत ही रोचक कथा मिलती है। आइये देखें कि क्या कहते हैं पुराण।
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इस तरह शरीर त्यागना पड़ा था राम कृष्ण लक्ष्मण और बलराम को
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सबसे पहले हम लक्ष्मण जी बात करते हैं कि क्योंकि रामावतार में राम से पहले लक्ष्मण जी को प्राण त्यागना पड़ा था। लक्ष्मण जी के बारे में जो कथा मिलती है वह बहुत ही हैरान करने वाली है क्योंकि जिस राम को लक्ष्मण भगवान की तरह मानते थे उन्होंने ही लक्ष्मण को मृत्युदंड दिया।
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कारण यह था कि यमराज के साथ राम जी की खास बातें हो रही। यमराज ने राम जी से वचन लिया था कि बात-चीत के दौरान जो भी आएगा उसे मृत्युदंड देना होगा। उस समय दुर्वासा ऋषि के दबाव में आकर लक्ष्मण जी राम जी के पास पहुंच गए। वचन के अनुसार राम जी को मृत्युदंड देना पड़ा और लक्ष्मण जी ने जल समाधि लेकर देह त्याग दिया।
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कथा है यमराज भगवान राम से वापस अपने लोक बैकुंठ पधारने का अनुरोध लेकर आए थे। यमराज के मुख से देवताओं की इच्छा जाकर भगवान राम ने सरयू नदी में प्रवेश किया और जल के मध्य में जाकर इन्होंने जल में समाधि ले ली और शरीर त्यागकर बैकुंठ चले गए।
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जिस तरह रामावतार में लक्ष्मण जी ने पहले त्याग किया था उसी प्रकार कृष्णावतार में भी शेषनाग के अंश बलराम जी ने पहले देह त्याग किया था। विष्णु पुराण में इस घटना के बारे में बताया गया है कि यादवों के बीच हो रहे आपसी संघर्ष के बीच निराश होकर बलराम जी सागर तट पर ध्यान लगाकर बैठ गए।
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श्री कृष्ण जी ने देखा कि बलराम जी के मुख से एक विशाल नाग निकल रहा है। उस विशाल नाग की पूजा में ऋषि मुनि और नाग लोक के नाग कर रहे हैं। देखते ही देखते वह नाग सागर में प्रवेश कर गया और बलराम जी ने शरीर त्याग दिया।
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बलराम जी के देह त्याग करने के बाद भगवान श्री कृष्ण अपने पैर पर पैर रखकर एक वृक्ष से सिर टेक कर बैठ गए। उस समय जरा नाम के एक शिकारी ने दूर से कृष्ण के पैरों को देखकर उसे हिरण समझ लिया और बाण चला दिया।
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कहते हैं बाण लगने के बाद श्री कृष्ण ने जरा को बताया कि यह उनकी प्रेरणा से ही हुआ है क्योंकि यही उनकी इच्छा थी। कहते हैं जरा पूर्व जन्म में बालि था जिसे भगवान राम ने पेड़ की ओट में छुपकर मारा था। रामावतार में किए उस कर्म का फल श्री कृष्ण ने भोगा।
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विष्णु पुराण में बताया गया है कि इस घटना से पूर्व देवताओं ने वायुदेव को अपना दूत बनाकर श्रीकृष्ण के पास भेजा था। वायु देव ने श्री कृष्ण से अनुरोध किया कि प्रभु अब आप अपने लोक लौट चलिए। इस अनुरोध के बाद श्री कृष्ण ने वायु देव से कहा कि जल्द ही यादवों का नाश होगा और वह अपने लोक वापस आ जाएंगे।