फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandra Grahan 2020: कब लग रहा है साल का पहला चंद्रग्रहण? जानें धार्मिक और ज्योतिषीय महत्त्व

Thu, 09 Jan 2020 09:27 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
कुछ ही दिनों के बाद साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण 10 जनवरी 2020 को लगेगा। इस साल कुल 6 ग्रहण लगेंगे जिनमें से 4 चंद्र ग्रहण और 2 सूर्य ग्रहण होंगे। शुक्रवार, 10 जनवरी को पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इस चंद्र ग्रहण की समय अवधी 4 घंटे से भी अधिक की रहेगी। ग्रहण रात 10 बजट 37 मिनट से शुरू होगा जो रात में 2 बजकर 42 मिनट पर खत्म होगा। ग्रहण से 12 घंटे पहले से सूतक काल शुरू हो जाता है, इसलिए शुक्रवार, 10 जनवरी को सुबह 10 बजे मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। 
 
विज्ञापन

2 of 6
  • चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। वैज्ञानिक और ज्योतिषीय नजरिए से इसका विशेष महत्व है। वैज्ञानिक रूप से ग्रहण एक अनोखी खगोलीय घटना है जबकि धार्मिक और ज्योतिष नजरिए से ग्रहण  की घटना व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ग्रहण को अशुभ माना गया है। 10 जनवरी की रात को एक बार फिर चंद्र ग्रहण लगने वाला है। आइए जानते हैं ग्रहण का वैज्ञानिक और पौराणिक महत्व।

 
विज्ञापन

3 of 6
- फोटो : AP
कैसे लगता चंद्र ग्रहण- वैज्ञानिक नजरिया
  • विज्ञान के अनुसार चंद्रमा पृथ्वी के चारो ओर घूमती है। पृथ्वी और चंद्रमा घूमते-घूमते एक समय पर ऐसे स्थान पर आ जाते हैं जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनो एक सीध में रहते हैं। जब पृथ्वी धूमते-धूमते सूर्य व चंद्रमा के बीच में आ जाती है। चंद्रमा की इस स्थिति में पृथ्वी की ओट में पूरी तरह छिप जाता है और उस पर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ पाती है इसे चंद्र ग्रहण कहते है। 
 

4 of 6
ग्रहण की धार्मिक मान्यताएं
  • पौराणिक मान्यता के अनुसार जब समुद्र मंथन चल रहा था तब उस दौरान देवताओं और दानवों के बीच अमृत पान के लिए विवाद पैदा शुरू होने लगा, तो इसको सुलझाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहिनी के रूप से सभी देवता और दानव उन पर मोहित हो उठे तब भगवान विष्णु ने देवताओं और दानवों को अलग-अलग बिठा दिया। लेकिन तभी एक असुर को भगवान विष्णु की इस चाल पर शक पैदा हुआ। वह असुर छल से देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए और अमृत पान करने लगा।

 
विज्ञापन

5 of 6
  • देवताओं की पंक्ति में बैठे चंद्रमा और सूर्य ने इस दानव को ऐसा करते हुए देख लिया। इस बात की जानकारी उन्होंने भगवान विष्णु को दी, जिसके बाद भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से दानव का सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन उस दानव ने अमृत को गले तक उतार लिया था, जिसके कारण उसकी मृत्यु नहीं हुई और उसके सिर वाला भाग राहू और धड़ वाला भाग केतू के नाम से जाना गया। इसी वजह से राहू और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं। पूर्णिमा और अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा का ग्रास कर लेते हैं। इसे सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कहते हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
  • ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है। अगर किसी की कुंडली में राहु- केतु बुरे भाव में जाकर बैठ जाता है तो उसको जीवन में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूर्य और चंद्रमा भी इसके प्रभाव से नहीं बच पाते। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें