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Masik Karthigai 2021: इस दिन है मासिक कार्तिगाई दीपम, जानें कथा, तिथि और पूजा विधि

Fri, 12 Feb 2021 04:58 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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मासिक कार्तिगाई 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
हिंदी पंचांग के अनुसार हर माह दक्षिण भारत में कार्तिगाई दीपम मनाया जाता है। इस बार मासिक कार्तिगाई का पूजन और व्रत 19 फरवरी 2021 दिन शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन का नाम कर्तिका नक्षत्र से लिया गया है, क्योंकि इस दिन कृतिका नक्षत्र प्रबल रहता है। तमिल लोग इस दिन को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाते हैं। इस दिन भगवान शिव की दिव्य ज्योति के रूप पूजा की जाती है। इस लोग पंक्तिबद्धि तरह से ज्योत जलाते हैं, जिससे दापावली जैसा प्रतीत होता है। तो चलिए जानते हैं कि कार्तिगाई दीपम पर क्यों कि जाती है शिव के ज्योति स्वरूप की पूजा और क्या है इसका महत्व एवं पूजा विधि....
 
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मासिक कार्तिगाई 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कार्तिगाई दीपम कथा
धार्मिक ग्रंथों में मिलने वाली पौराणिक कथा के अनुसार चिरकाल में एक बार भगवान ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद होने लगा। दोनों ही स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने लगे। तब इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव ने स्वयं को दिव्य ज्योति में परिवर्तित कर लिया। जिसके बाद उन्होंने दोनों देवों से उस दिव्यज्योति का सिरा और अंत ढूंढने को कहा। कार्तिगाई दीपम पर भगवान शिव के इसी ज्योति स्वरूप का पूजन किया जाता है। 
 
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मासिक कार्तिगाई 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कार्तिगाई दीपम महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिगाई के दिन भगवान शिव की पूजा करने और दीप जलाकर उनका आवाह्न करने से जीवन से नकारात्मकता का नाश होता है, और जीवन में एक नई ऊर्जा और प्रकाश का संचार होने लगता है। भगवान शिव की कृपा से परिवार में सब कुछ कुशल मंगल रहता है।

 
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मासिक कार्तिगाई 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
कार्तिगाई पूजा एवं व्रत विधि
  • कार्तिगाई दीपम पूजा के दिन प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में उठें और इसके बाद स्नान से निवृत होकर भगवान के समक्ष व्रत संकल्प लें।
  • तत्पश्चात, भगवान शिव जी की पूजा-उपासना सच्ची श्रद्धा और भक्ति से करें। 
  • इसके बाद पूरे दिन भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत करें।
  • यदि आप दिनभर निराहार उपवास करने में सक्षम नहीं हैं तो फलाहार कर सकते हैं। 
  • संध्याकाल में शुभ मुहूर्त में दीप प्रज्वलित करके भगवान शिव का आह्वान करें।
  • भगवान शिव की पूजा प्रार्थना करें। 
  •  अगले दिन के बाद प्रातः भगवान की पूजा-पाठ करने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण करके व्रत का पारणा करें।
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