फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ मंगलवार के दिन करें यह काम, धन की परेशानी होगी दूर

Tue, 02 Aug 2022 03:05 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
Hanuman Chalisa - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की पूजा-उपासना को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि नियमित रूप से हर मंगलावार के दिन जो व्यक्ति भगवान हनुमान की पूजा और उनके लिए व्रत रखता है उसकी सभी तरह की मनोकामनाएं अवश्य ही पूरी होती है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत ही शुभफलदायी होता है। हनुमान जी की पूजा-पाठ और विधि विधान से उपासना करने सुख,शांति,आरोग्य और लाभ की प्राप्ति होती है। नियमित रूप से जो लोग हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं उन्हें नकारात्मक शक्तियां परेशान नहीं करती। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है। इसके अलावा मंगलवार के दिन कुछ उपाय करने से भगवान हनुमान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
विज्ञापन

2 of 6
Hanuman Chalisa - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार के दिन जरूर करें ये काम
राम नाम की माला का जाप- भगवान राम की पूजा करने और राम नाम की माला से राम-राम का नाम जपने से हनुमानजी बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।
 
विज्ञापन

3 of 6
Hanuman Chalisa Benefits - फोटो : अमर उजाला
चोला चढ़ाएं
जीवन की तमाम बाधाएं जैसे भूत-पिशाच,शनि दोष, ग्रहदोष,रोग-शोक,कोर्ट-कचहरी के विवाद,दुर्घटना और कर्ज आदि को दूर करने के लिए मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी तो चोला चढ़ाएं।

4 of 6
Hanuman Ji - फोटो : iStock
हनुमान चालीसा और सुन्दरकांड
मंगलवार के दिन हनुमान जी की प्रतिमा के सामने घी के दीपक जलाते हुए हनुमान चालीसा पाठ करना चाहिए। जो भक्त नियमित रूप से मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। हनुमानजी उनकी हर मनोकामना को  पूरी करते हैं।
विज्ञापन

5 of 6
Hanuman Ji - फोटो : iStock
तुलसी के पत्ते, लाल और पीले रंग के पुष्प चढ़ाएं
मंगलवार के दिन भगवान हनुमान को तुलसी के पत्ते अर्पित करने पर वह बहुत प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा हनुमान जी को लाल,गुलाबी या पीले रंग के पुष्प जैसे गुलाब,गुड़हल,कमल,गेंदा,कनेर या सूर्यमुखी अर्पित करने से आपको सारे सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 

गुड़-चने का प्रसाद
मंगलवार के दिन हनुमान जी के दर्शन करते हुए उन्हें गुड़ और चने का प्रसाद चढाएं। मान्यता है कि गुड़-चने का प्रसाद चढ़ाने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
भगवान हनुमान - फोटो : Pixabay

हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन वरन विराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै। शंकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा। नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना।। जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा। तिनके काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों युग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस वर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को भावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

दोहा 
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें