अधिक मास
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वहीं शास्त्रों के अनुसार जिस माह में संक्रांति नहीं होती है उसे अधिक मास कहा जाता है। इस महीने शादी, सगाई, जडुला, गृह निर्माण आरम्भ, गृहप्रवेश, मुंडन, संन्यास अथवा शिष्य दीक्षा लेना, नववधू का प्रवेश, देवी-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा, यज्ञ, बड़ी पूजा-पाठ का शुभारंभ, कूप, बोरवेल, जलाशय खोदने जैसे पवित्र कार्य नहीं किए जाते हैं। हालांकि इस महीने कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें करने से जातकों को उसका सर्वाधिक लाभ भी मिलता है। ये कार्य इस प्रकार हैं..