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अधिकमास शुरू, जानिए क्या होता है मलमास, 13 जून तक भूलकर भी ना करें ये काम

Wed, 16 May 2018 11:34 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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16 मई, बुधवार से मलमास शुरू हो चुका है। मलमास को अधिकमास, पुरूषोतम मास भी कहते हैं। अधिकमास 13 जून तक रहेगा। शास्त्रों में मलमास के महीने का विशेष महत्व होता है। इस माह में पूजा करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में मलमास में कई तरह के नियम बताए गए हैं। इस माह में कुछ काम करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है तो वहीं कुछ काम को वर्जित माना गया है।
 
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क्या होता है मलमास
भारतीय ज्योतिष सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के आधार पर चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। पंचांग के हिसाब से तीन वर्षों तक तिथियों का क्षय होता है।  वह माह तीसरे वर्ष में अधिक मास के रूप में शामिल होता है। इन दिनों 16 मई से 13 जून तक की अवधि अधिक मास की रहेगी। 
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मलमास और पुरूषोत्तम का नाम क्यों 
पुरूषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है इसीलिए अधिकमास को पुरूषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान सभी शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। अतिरिक्त माह होने के कारण यह मास मलिन होता है। मलिन के कारण इस मास का नाम मल मास पड़ गया है। 
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मलमास में क्या करें और क्या ना करें
-अधिकमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए 16 मई से 13 जून तक विष्णुजी का जाप विशेष लाभकारी होता है। 
-पुरुषोत्तम मास में जमीन पर सोना, पत्तल पर भोजन करना, शाम को एक वक्त खाना शुभ माना जाता है। 
- इन माह में सादा भोजन ग्रहण करना चाहिए। मांस, नशीली चीजें का सेवन करने से बचना चाहिए।
- मलमास में तांबे के बर्तन में रखा दूध नहीं पीना चाहिए।
 
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