Mahesh Navami
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महेश नवमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
महेश नवमी का पर्व सिर्फ शिव उपासना का दिन नहीं है, बल्कि यह माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति और उसके आध्यात्मिक उत्थान से जुड़ा हुआ विशेष अवसर भी है। मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को माहेश्वरी समाज के पूर्वज, जो किसी ऋषि के श्राप से पीड़ित थे, भगवान शिव की कृपा से उस श्राप से मुक्त होकर नया जीवन प्राप्त कर सके। इसी कारण इस दिन को "महेश नवमी" के रूप में मनाया जाता है।
माहेश्वरी समाज इस दिन को अपनी संस्थापक तिथि के रूप में श्रद्धा और भक्ति से मनाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। शिव को कुलदेवता मानने वाला यह समाज मानता है कि शिव की आज्ञा से ही उन्होंने क्षत्रिय कर्म त्यागकर वैश्य धर्म को अपनाया और समाज सेवा, व्यापार और आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर हुए। इस दिन शिवभक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं, जिससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गर्व भी सशक्त होता है।
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