महाशिवरात्रि
महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति की कथा
इस मंत्र का उल्लेख ऋग्वेद (मंडल 7, हिम 59) में किया गया है। भगवान शिव के अनन्य भक्त ऋषि मृकण्डु और उनकी पत्नी मरुद्मति की कोई संतान नहीं थी। संतान की कामना के लिए दोनों ने भगवान शिव की तपस्या आरंभ कर दी। लेकिन ऋषि मृकण्डु के भाग्य में संतान सुख नहीं था। फिर भी भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रभावित होकर उन्हें दो विकल्प दिए। जिसमें पहला विकल्प अल्पायु बुद्धिमान पुत्र का वरदान और दूसरा दीर्घायु मंदबुद्धि पुत्र का वर।तब बहुत सोच विचार के बाद ऋषि मृकण्डु ने पहले विकल्प को चुना और उन्हें मार्कंडेय नाम के पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका जीवन काल मात्र 12 वर्ष का था।