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Somvar Ke Upay: सोमवार को इस एक उपाय से करें दिन की शुरुआत,  सभी समस्याओं से मिलेगी मुक्ति

Mon, 16 Jun 2025 05:31 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Somvar Ke Upay: शास्त्रों में सोमवार की आराधना से लेकर प्रभु की महिमा का जिक्र किया गया है। यदि इस दिन केवल शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाए, तो बड़े से बड़े संकट का निवारण होता है। 
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Mahamrityunjay Mantra - फोटो : freepik
Mahamrityunjay Mantra: सोमवार सप्ताह का पहला दिन है, जिसे महादेव की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन महाकाल की उपासना और उपवास रखने से वह प्रसन्न होते हैं। यही नहीं भक्तों पर अपनी कृपा भी बरसाते हैं। शास्त्रों में सोमवार की आराधना से लेकर प्रभु की महिमा का जिक्र किया गया है। यदि इस दिन केवल शिवलिंग पर जल अर्पित किया जाए, तो बड़े से बड़े संकट का निवारण होता है। वहीं वैवाहिक जीवन सुखमय और रिश्तों में प्रेम के लिए महिलाएं सोमवार का व्रत भी रखती हैं। हालांकि इस दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यदि सोमवार के दिन की शुरुआत इस मंत्र से की जाए, तो व्यक्ति भयमुक्त के साथ-साथ रोग मुक्त जीवन भी जीता है। साथ ही उसके मन से अकाल मृत्यु का डर भी दूर होता है। ऐसे में आइए इस शक्तिशाली मंत्र के बारे में जानते हैं।
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Mahamrityunjay Mantra - फोटो : अमर उजाला
महामृत्युंजय मंत्र 
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
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Mahamrityunjay Mantra - फोटो : freepik
महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ 
हम महादेव की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो सुगंधित हैं और हमारा पोषण करते हैं। जैसे फल शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएं।

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Mahamrityunjay Mantra - फोटो : freepik
महामृत्युंजय मंत्र के फायदे
  • तनाव मुक्त जीवन
  • नकारात्मकता से मुक्ति
  • भगवान शिव की कृपा
  • जातक के धन-धान्य में वृद्धि
  • मनुष्य निरोगी बनता है
  • अकाल मृत्यु का भय समाप्त
  • करियर में लाभ
  • वैवाहिक जीवन सुखमय
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Mahamrityunjay Mantra - फोटो : adobe
सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
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Mahamrityunjay Mantra - फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
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Mahamrityunjay Mantra - फोटो : Amar Ujala
भगवान शिव की आरती

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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