ganga snan
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स्नान का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
माघ पूर्णिमा स्नान को सिर्फ शास्त्रों में ही नहीं बल्कि वैज्ञानिकों ने भी माना है। माघ के महीने में ऋतु परिवर्तन होता है इसलिए नदी के जल में स्नान एवं सूर्य को अर्घ्य प्रदान करने से रोगों से मुक्ति मिलती है। दूसरा कारण,चंद्रमा का सम्बन्ध मन से होने के कारण भी यह व्रत मन की पवित्रता और चित्त की शांति के लिए किया जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आध्यात्मिकता का विकास होता है। दरअसल सर्दी का आगमन और गमन दोनों ही रोगकारक होते हैं इसलिए इस दौरान शरीर से विषैले पदार्थों का निष्कासन भी ज़रूरी होता है। व्रत करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। भगवान विष्णु के व्रत में नियम, संयम ,वाणी,कर्म और आचरण की पवित्रता का ध्यान रखना जरूरी है।