नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की भक्ति, उपासना और श्रद्धा का प्रतीक है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और घर में कलश स्थापना करके माता रानी से सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। नवरात्रि के अंतिम दिन पूजा का समापन मां दुर्गा की आराधना, हवन, कन्या पूजन और कलश विसर्जन जैसी परंपराओं के साथ किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विसर्जन के दौरान मां दुर्गा को श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है और उनसे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है। कई भक्तों के मन में सवाल रहता है कि घर पर मां दुर्गा का विसर्जन कैसे करना चाहिए और कलश में रखे जल, नारियल, जौ तथा पूजा सामग्री का क्या करना चाहिए। यदि आपने नवरात्रि के दौरान घर में घटस्थापना की है, तो पूजा के समापन पर विधि-विधान से कलश पूजन करें, मां दुर्गा की आरती उतारें और अपनी पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें। इसके बाद कलश में रखी सामग्री को अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धापूर्वक संभालें। कलश विसर्जन की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती है। विसर्जन करते समय श्रद्धा के साथ स्वच्छता और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। कलश के जल, जौ और अन्य प्राकृतिक पूजा सामग्री का उपयोग परंपरा के अनुसार किया जा सकता है। वहीं, प्लास्टिक, रासायनिक रंगों या अन्य गैर-जैविक सामग्री को नदियों और तालाबों में डालने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं घर पर मां दुर्गा का विसर्जन करने की सही विधि, कलश विसर्जन के नियम और पूजा की सामग्री से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें, ताकि नवरात्रि का समापन श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक भाव के साथ किया जा सके।