जब प्रभु श्री राम ने शबरी के जूठे बेर खाए(प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रभु श्रीराम की रामायण से सीख मिलती है कि हमें किसी के प्रति ऊंच-नीच की भावना नहीं रखनी चाहिए। संसार में सभी एक समान हैं। प्रभु राम ने वन में रहते हुए शबरी के जूठे बेर खाएं। वे वन में वनवासियों और आदिवासियों की तरह ही रहे। उन्होंने केवट, जटायु, संपाती, शबरी, वानर, रीछ आदि सभी जनजातियों ने साथ एक समानता का व्यवहार किया। मनुष्य के साथ उन्होंने पशु-पक्षियों से भी एक जैसा विनम्र व्यवहार किया। रामायण के हर पात्र में यही भावना दिखती है। हमें भी इस सीख का अनुसरण अपने जीवन में करना चाहिए।