जिसने भी इस पृथ्वी जन्म लिया और ईश्वर में विश्वास करता है तो वह ईश्वर की भक्ति अवश्य करता है। पृथ्वी पर जन्म लेने वाले ज्यादातर लोग भगवान में आस्था रखते हैं और उनकी भक्ति करते हैं, परंतु हर मनुष्य का भक्ति करने का तरीका भिन्न होता है। सभी अपनी तरह से ईश्वर को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने स्वंय इस बारे में बताते हुए कहा है कि चतुर्विधा भजन्ते मां जना: सुकृतिनोऽर्जुन। आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ।। इस तरह से भगवान कृष्ण ने चार प्रकार के भक्तो के बारे में बताया है। ये चार प्रकार के भक्त होते हैं ''आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी''
अर्थार्थी सबसे निम्न श्रेणी के भक्त हैं। उससे श्रेष्ठ आर्त, आर्त से श्रेष्ठ जिज्ञासु, और जिज्ञासु से भी श्रेष्ठ भक्त ज्ञानी हैं।