लोहड़ के त्योहार पर सभी लोगों में उत्साह देखने लायक होता है लेकिन जिनकी नई-नई शादी हुई होती है उनके लिए यह त्योहार कुछ खास ही होता है। इस मौके दूल्हा-दुल्हन खूब सज धज कर लोहड़ी की पवित्र अग्नि के सामने फेरे लेते हैं और नाचते गाते हैं। इस परंपरा को लोग वर्षों से निभाते चले आए हैं लेकिन बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि इसकी वजह क्या है।
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इसलिए नवविवाहित दूल्हा दुल्हन के लिए लोहड़ी होती है खास
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शिव सती
इस परंपरा से जुड़ी एक पौराणिक कथा है जिसका संबंध भगवान शिव और देवी पार्वती से है। कथा के अनुसार देवी पार्वती अपने पूर्वजन्म में दक्ष प्रजापति की पुत्री सती हुई और पिता के मर्जी के खिलाफ जाकर इन्होंने भगवान शिव से विवाह किया जिससे प्रजापति दक्ष नाराज हो गए और भगवान शिव एवं अपनी पुत्री सती को त्याग दिया।
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शिव सती
एक बार जब प्रजापति दक्ष ने यज्ञ का आयोजन किया तब सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया लेकिन भगवान शिव और सती को न्योता नहीं भेजा। देवी सती को पिता का यह व्यवहार अच्छा नहीं लगा फिर भी भगवान शिव के मना करने के बावजूद वह अपने पिता के द्वारा आयोजित यज्ञ में शामिल होने पहुंच गई।
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शिव नटराज
- फोटो : shiv natraj
देवी सती को देखकर पिता दक्ष ने भगवान शिव और सती का खूब अपमान किया। इससे दुखी होकर देवी सती यज्ञ कुंड में कूद गई और भष्म हो गई। इसके बाद भगवान शिव ने प्रलय मचा दिया। बाद में प्रजापति को अपनी पुत्री के अपमान और भष्म होने का बड़ा दुख हुआ।
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लोहड़ी
अगले जन्म में जब देवी सती पार्वती बनी और भगवान शिव के साथ उनका विवाह तब लोहड़ी के अवसर पर प्रजापति दक्ष ने उपहार भेजकर अपनी भूल का प्रायश्चित किया उस दिन से ही लोहड़ी के अवसर पर कन्या को मायके से उपहार भेजने की परंपरा शुरु हो गई।
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लोहड़ी
ऐसी भी मान्यता है कि लोहड़ी की आग सेंकने से नव वर वधू को नजर दोष नहीं लगता है और संतान सुख की प्राप्ति जल्दी होती है। जिनके घर संतान का जन्म होता है वह अपने बच्चे को लोहड़ी की आग से सेंकते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए फायदेमद होता है।