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प्रयागराज कुंभ 2019 : जानिए नागा साधु बनने से लेकर महामंडलेश्वर चुने जाने तक की पूरी प्रकिया

Thu, 10 Jan 2019 05:15 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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14 जनवरी से तीर्थराज प्रयाग की पावन धरती पर कुंभ 2019 का शुभारंभ हो जाएगा। 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन पहला शाही स्नान होगा। पहले से ही सभी 13 अखाड़ों के साधु संत प्रयागराज में एकत्र हो चुके हैं। संगम की रेती पर विशाल जनसमूह का गजब का नजारा देखने को मिलेगा जिसमें सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र अलग-अलग अखाड़ों के नागा साधुओं का रहेगा। वैसे तो किसी आम आदमी के लिए संन्यासी का जीवन बिताना  काफी कठिन होता है। नागा साधु बनने के लिए व्यक्ति को तमाम मुश्किल भरी बाधाओं और परेशानियों को पार करना होता है तब जाकर नागा से किसी आधाड़े का महामंडलेश्वर के पद पर पहुंचता है। नागा साधु बनने के लिए कुछ नियम और कायदे होते हैं जिसका पालन जिंदगी भर किया जाता है।
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प्रयागराज कुंभ 2019
पहली परीक्षा - जांच पड़ताल
जब किसी भी व्यक्ति की यह इच्छा होती है कि वह सारे सांसारिक भोग-विलास का जीवन त्यागकर नागा साधु बनने का निर्णय लेता है उसे किसी अखाड़े से सम्पर्क करना होता है। अखाड़ा अपने स्तर उस व्यक्ति और उसके परिवार के बारे में सारी जानकारी एकत्र करता है। सारी जानकारी लेने के बाद अखाड़े में प्रवेश मिलता है।
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दूसरी परीक्षा - ब्रह्मचर्य का पालन 
अखाड़े में प्रवेश मिलने के बाद व्यक्ति को ब्रह्मचर्य के कठोर नियमों का पालन और परीक्षा देनी होती है। इस प्रक्रिया में 6 महीने से लेकर 12 साल तक का समय लग जाता है। ब्रह्मचर्य की परीक्षा पास करने के बाद ही उसे अगली प्रक्रिया में शामिल करने का मौका मिलता है।

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नागा साधुओं ने निकाली शोभायात्रा - फोटो : अमर उजाला
तीसरी परीक्षा- महापुरुष बनने की प्रक्रिया
ब्रह्मचर्य की परीक्षा पास करने के बाद साधु को महापुरुष बनाया जाता है। इसके लिए लिए 5 गुरु बनाए जाते हैं उन्हीं के दिशा निर्देशों का उन्हें पालन करना होता है।
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प्रयागराज कुंभ 2019
चौथी परीक्षा- स्वयं का पिंडदान और श्राद्ध करना
नागा साधु बनने के लिए यह प्रक्रिया सबसे खास मानी जाती है। महापुरुष बनने के बाद नागा साधु को अवधूत बनने की परीक्षा देनी होती है। इस प्रकिया में सबसे पहले मुंडन किया जाता है इसके बाद स्वयं को मृत मानकर अपने हाथों से श्राद्ध और पिंडदान करते हैं।
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Naga Sadhu
पांचवीं परीक्षा- नपुंसक बनाना
अवधूत की परीक्षा पास करने के बाद नागा को दिगंबर साधु बनने की परीक्षा देनी होती है। इस प्रक्रिया में साधु को नग्न अवस्था में 24 घंटे के लिए अखाड़े के ध्वज के नीचे खड़ा होना पड़ता है। बाद में अखाड़े का एक वरिष्ठ साधु उस व्यक्ति के लिंग की एक विशेष नस खींचकर उसे नपुंसक बना देता है।
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Naga Sadhu
छठी परीक्षा- गुरुमंत्र
दीक्षा के बाद गुरु से नागा साधु को गुरुमंत्र मिलता है। यह गुरु मंत्र हमेशा उसके जीवन तक उसका साथ देता था।

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Naga Sadhu
सातवीं परीक्षा-शरीर पर भस्म और रूद्राक्ष धारण करना
नागा साधु कभी भी अपने शरीर पर किसी  भी तरह का कोई वस्त्र नहीं पहनते। नागा साधुओं को भस्म एवं रूद्राक्ष धारण करना पड़ता है। स्नान के बाद नागा साधु सबसे पहले अपने शरीर पर भस्म रमाते हैं। यह भस्म भी प्रतिदिन  ताजी होती है।सूर्योदय से पूर्व उठ जाने के बाद नित्यक्रिया और स्नान के बाद नागा साधु अपना श्रृंगार करते हैं। भभूत, रुद्राक्ष, कुंडल आदि से श्रृंगार करने वाले नागा साधु अपने साथ त्रिशूल, डमरू, तलवार, चिमटा, चिलम आदि साथ रखते हैं।

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Naga Sadhu
आठवीं परीक्षा- जीवनभर एक समय भोजन करना
नागा साधु बनने पर दिन में केवल एक ही समय भोजन करना होता है। नागा साधु को केवल 7 घरों में ही भिक्षा मांगने का अधिकार होता है।

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naga sadhu - फोटो : amarujala
नौवीं परीक्षा- बस्ती के बाहर रहना और जमीन पर सोना
नागा साधु को जिंदगी भर जमीन पर ही सोना पड़ता है और सूनसान जगहों पर ही निवास करना होता है। नागा संनयासी कभी भी एक स्थान पर लंबे समय तक नहीं टिकते हैं और पैदल ही भ्रमण करते हैं।
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Naga Sadhu
दसवीं परीक्षा- पद प्राप्त करना
नागा साधु के बाद महंत, श्रीमहंत, जमातिया महंत, थानापति महंत, पीर महंत, दिगंबरश्री, और महामंडलेश्वर जैसे पद प्राप्त होते हैं।
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