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रावण के पिता की लालच के कारण सोने की लंका में लगी थी आग

Tue, 06 Aug 2019 08:57 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हम सभी बचपन से लेकर अपने युवा अवस्था तक रामायाण टीवी या सिनेमा के जरिए देखते रहते हैं। हम सभी जानते हैं कि रामायण में हनुमानजी ने रावण के सोने की लंका में आग लगाई थी। लेकिन क्या आपको पता है कि इसके पीछे का मुख्य कारण क्या था। दरअसल, यह सबकुछ एक श्राप के कारण हुआ था। तो आइए जानते हैं कि आखिर क्या हुआ था जो एक देवी ने लंका जलने का श्राप दे दिया।
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- फोटो : social media
पौराणिक कथाओं के मुताबिक एक बार मां पार्वती ने विष्णु और लक्ष्मी जी को कैलाश पर भोजन पर आने के लिए निमंत्रण दिया। तब मां सक्ष्मी ने उनसे पूछा कि आप इतनी ठंडी हवाओं के बीच कैसे रह लेती हैं। और वह भी तब जब राजकुमारी का जीवन व्यतीत कर चुकी हैं। इस सवाल से माता पार्वती काफी आहत हुई। कुछ दिनों बाद मां लक्ष्मी ने देवी पार्वती को अपने बैकुठं धाम आने का न्यौता दिया। 
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न्यौता मिलने पर मां पार्वती शिवजी के साथ बैकुंठ धाम पर पहुंची। बैकुंठ वैभव और ऐश्वर्य देखकर उन्होंने भी भोलेनाथ से एक अत्यंत वैभवशाली महल का निर्माण करने को कहा। पहले शिवजी मां पार्वती को बहुत समझाने का प्रयास किया। लेकिन जब मां पार्वती नहीं मानी तो शिवजी ने विश्वकर्मा जी को महल निर्माण का कार्य सौंपा। इसके बाद ही उन्होंने सोने का महल तैयार किया। 

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सोने का महल जब तैयार हुआ तो मां पार्वती ने सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया। महल की वस्तुप्रतिष्ठा की पूजा के लिए रावण के पिता ऋषि विश्रवा जो कि अत्यंत विद्वान थे, उन्हें बुलाया गया। महल की चकाचौंध देखकर ऋषि विश्रवा का मन डोल गया और उन्होंने भोलेनाथ से महल को ही दान में मांग लिया। शिव ने निराश ना करते हुए महल को उन्होंने ऋषि विश्रवा को दान दे दिया। 
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- फोटो : google
मां पार्वती को इससे भारी दुख हुआ और उन्होंने ऋषि विश्रवा को दान में लिए गए महल को जलाने का ऋाप दे दिया। उनके श्राप के कारण ही हनुमान जी ने सोने की लंका को जलाकर भस्म कर दिया था। 
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