फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शंख बजाने से दूर होती है ये गंभीर बीमारी, इन 6 बातों से समझें धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

Wed, 30 Jan 2019 02:02 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
हिंदू धर्म में शंख को बहुत ही पवित्र और शुभ चीज माना गया है। पौराणिक रूप से शंख की उत्पत्ति समुद्र से मानी जाती है। समुद्र मंथन के दौरान मिले 14 रत्नों में से छठवां रत्न शंख था। विष्णु पुराण के अनुसार माता लक्ष्मी समुद्र की पुत्री हैं और शंख उनके भाई इसलिए जिस घर पर शंख होता है वहां पर माता लक्ष्मी का वास जरूर होता है। हिन्दू धर्म में मांगलिक कार्यो, विवाह, धार्मिक अनुष्ठानों और रोजाना पूजा-पाठ में शंख बजाने का नियम है। घर के पूजा घर में शंख की स्थापना करना शुभ होता है। शंख रखने और बजाने का न सिर्फ धार्मिक महत्व है बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। विज्ञान के मुताबिक शंख की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है। आइए जानते हैं शंख का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व...
विज्ञापन

2 of 7
रोजाना शंख बजाने से व्यक्ति के शरीर पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। खासतौर पर फेफड़ों से संबंधित रोग के लिए शंख बजाना बहुत ही असरदार माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार शंख बजाने से दमा, कास प्लीहा, यकृत और इंफ्लूएंजा नामक रोग दूर होता है। इससे किडनी और जननांगों पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
विज्ञापन

3 of 7
शास्त्रों में वर्णन है कि शंखघोष से निकलने वाली ओम का नाद मानसिक रोगों को दूर करता है। इससे कुंडलिनी जागरण की शक्ति भी विकसित होती है। शंखनाद से शरीर और आस-पास के वातावरण शुद्ध होता है और सतोगुण की वृद्धि होती है। 

4 of 7
शंख बजाना शुभ माना जाता है लेकिन कुछ समय ऐसे हैं जब शंख नहीं बजाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार रात में संध्या आरती के बाद शंख नहीं बजाना चाहिए। इससे लक्ष्मी नाराज होती है और आर्थिक नुकसान होता है।
विज्ञापन

5 of 7
 विज्ञान के नजरिए से महिलाओं को गर्भावस्था के दौरन शंख नहीं बजाना चाहिए। शंख बजाने से गर्भ पर दबाव पड़ता है।
विज्ञापन

6 of 7
blowing conch
जिन बच्चों के बोलने में किसी तरह की समस्या आती है तो उनकी वाणी संबंधी परेशानी दूर करने के लिए भी बच्चे को शंख में पानी भरकर पिलाना फायदेमंद होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
h - फोटो : d
अगर किसी कारण से किसी को संतान सुख में बाधा आ रही है उन्हें नियमित दक्षिणवर्ती शंख में दूध भरकर शालिग्राम को स्नान करना चाहिए। पत्नी को प्रसाद स्वरुप यह दूध पिलाएं। माना जाता है कि इससे संतान प्राप्ति में आने वाली समस्या दूर होती है। व्यक्ति को संतान सुख प्राप्त होता है।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें