कई महत्वपूर्ण ग्रंथों और पुराणों में लिखा गया है कि हर व्यक्ति को एक दिन जरूर मरना है। क्योंकि यह धरती मृत्यु लोक है। हालांकि मौत के लिए हर व्यक्ति का समय तय होता है और वह उसी वक्त वह जाता है। वहीं अकाल मृत्यु को ईश्वर का दंड माना जाता है और जब तक उसकी वास्तविक मृत्यु का समय नहीं आता वह बिना शरीर के भटकता रहता है। शिव पुराण में कामदेव की कथा का जिक्र किया गया है, जिसमें शिव जी द्वारा भष्म किए जाने के बाद कामदेव अशरीरी होकर भटकते रहते हैं, लेकिन जिनकी प्राकृतिक मौत होती है उन्हें उनकी मौत से पहले कुछ संकेत मिलते हैं और यह काम नहीं कर पाते हैं।
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