क्यों लगता है खरमास?
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रह को सबसे प्रधान ग्रह माना जाता है। यह एक राशि में लगभगन एक महीने तक रहता है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को संक्रांति कहा जाता है। वहीं जब सूर्यदेव देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन आते हैं खरमास लग जाता है। 14 मार्च को सूर्य मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं।
खरमास में क्यों नहीं होते हैं मांगलिक कार्य?
खरमास में खर का अर्थ 'दुष्ट' होता है और मास का अर्थ महीना होता है, इसे आप 'दुष्टमास' भी कह सकते हैं। यही वजह है कि खरमास में शादी-विवाह, गृह आरंभ, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण आदि मांगलिक कार्य शास्त्रानुसार निषेध कहे गए हैं।
जानें खरमास के दौरान क्या करें
खरमास के दौरान नियमित रूप से सूर्यदेव की उपासना करनी चाहिए। इससे भगवान सूर्य की कृपा से मान-सम्मान और तरक्की होती है। इस माह दान करना बहुत पुण्यकारी रहता है। इस समय ब्राह्मण, गुरू और साधुओं की सेवा करनी चाहिए। इसके साथ ही इस माह गौ माता की सेवा करना बहुत शुभ फलदायक होता है। शास्त्रों के अनुसार, यदि आप खरमास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करते हैं तो आपके घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। इस महीने सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि करके भगवान का ध्यान करना चाहिए और संध्या वंदन करना चाहिए।
जानिए खरमास में क्या न करें
खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य न करें। इस माह में देर तक न सोएं, पलंग पर नहीं सोना चाहिए। जमीन पर सोना श्रेष्ठ रहता है। इसके साथ ही किसी को अपशब्द न कहें, वाद-विवाद करने से बचें। असत्य का त्याग करें। अगर आप खरमास के दौरान सात्विकता बनाए रखेंगे और मांस-मदिरा का सेवन से बचेंगे तो निश्चित ही आपके ऊपर प्रभु की कृपा बरसेगी।