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कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुई थी महाभारत की यह दो बड़ी घटनाएं

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महाभारत सिर्फ 18 दिनों तक चलने वाला महायुद्ध नहीं था बल्कि एक नए युग का आरंभ भी था। इसलिए महाभारत की घटनाओं का इतिहास में बड़ा महत्व है। महाभारत ने आने वाले युग को कई संस्कार और ज्ञान भी दिए जिसके आगे लोग आज भी श्रद्धा से सिर झुकाते हैं। इनमें कार्तिक पूर्णिमा के दिन महाभारत काल की यह दो घटनाएं भी बड़ी खास है।
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कार्त‌िक पूर्ण‌िमा के द‌िन हुई थी महाभारत की यह दो बड़ी घटनाएं

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ऐसी कथा है क‌ि महाभारत का युद्ध जब समाप्त हो गया और यह तय हुआ क‌ि हस्त‌िनापुर पर पांडवों का अध‌िकार हो गया है तब कौरवों के प‌िता धृतराष्ट्र राजमहल छोड़कर वन जाने के ल‌िए तैयार हो गए। इनके साथ कौरवों की माता गांधारी और पांडवों की माता कुंती भी चल पड़ी।
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कार्त‌िक पूर्ण‌िमा के द‌िन हुई थी महाभारत की यह दो बड़ी घटनाएं

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युध‌िष्ठ‌िर ने धृतराष्ट्र को वन जाने से रोक ल‌िया और अनुरोध क‌िया क‌ि आप महल में हमारे साथ रहें। धृतराष्ट्र को युध‌िष्ठ‌िर अनुरोध स्वीकार करना पड़ा और महल में ही रुक गए। लेक‌िन भीम के व्यवहार से धृतराष्ट्र दुःखी रहने लगे।

कार्त‌िक पूर्ण‌िमा के द‌िन हुई थी महाभारत की यह दो बड़ी घटनाएं

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एक द‌िन भीम की बातों से आहत होकर धृतराष्ट्र ने तय कर ल‌िया क‌ि वह अब वन में चले जाएंगे। और कार्त‌िक पूर्ण‌िमा के द‌िन धृतराष्ट्र ने महल का त्याग कर द‌िया। इनके साथ गांधारी, कुंती और व‌िदुर भी वन में चले गए।
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कार्त‌िक पूर्ण‌िमा के द‌िन हुई थी महाभारत की यह दो बड़ी घटनाएं

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इस घटना के अलावा कार्त‌िक पूर्ण‌िमा के द‌िन महाभारत की एक और बड़ी घटना हुई थी। कहते हैं क‌ि सम्राट बनने के बाद भी युध‌िष्ठ‌िर का मन अपने उन पूर्वजों के ल‌िए परेशान रहता था जो महाभारत युद्ध में मारे गए थे। इसल‌िए श्री कृष्‍ण की सलाह से कार्त‌िक पूर्ण‌िमा के द‌िन ही युध‌िष्ठ‌िर ने गढमुक्तेश्वर में युद्ध में मारे गए लोगों की आत्मा शांत‌ि के ल‌िए श्राद्ध क‌िया था।
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