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कार्तिक मास में तुलसी पूजा के क्या हैं नियम? जानें सुबह-शाम दीपक जलाने का महत्व

Wed, 28 Oct 2026 08:07 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

कार्तिक मास में तुलसी पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने तुलसी पूजन और दीपदान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। जानें तुलसी पूजा के जरूरी नियम और सही विधि।
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कार्तिक मास में तुलसी पूजन का महत्व - फोटो : amar ujala
Kartik Maas Tulsi Puja Rules: हिंदू धर्म में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, स्नान, दान और भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस महीने तुलसी पूजन का भी खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय हैं, इसलिए कार्तिक मास में तुलसी के पौधे की पूजा करना, उसके पास दीपक जलाना और भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है। हालांकि, पूजा के दौरान कुछ पारंपरिक नियमों का ध्यान रखने की भी सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं कार्तिक मास 2026 में तुलसी पूजा से जुड़े जरूरी नियम और इसका धार्मिक महत्व।
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कार्तिक मास कब से कब तक ? - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कार्तिक मास कब से कब तक ?
कार्तिक मास 27 अक्तूबर से शुरू हो चुकी है और 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के साथ समाप्त होगा। इस पूरे महीने में श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, स्नान, दान और दीपदान जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। तुलसी पूजन भी इसी महीने की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है।
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कार्तिक मास में तुलसी पूजा के जरूरी नियम - फोटो : adobe stock
कार्तिक मास में तुलसी पूजा के जरूरी नियम
  • कार्तिक मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा करने की परंपरा है। तुलसी के पौधे के आसपास की जगह साफ करें और श्रद्धापूर्वक माता तुलसी को प्रणाम करें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार जल अर्पित कर सकते हैं और भगवान विष्णु का स्मरण कर सकते हैं।
  • कार्तिक मास में तुलसी के पौधे के पास शाम को दीपक जलाना एक प्रचलित धार्मिक परंपरा है। मान्यता है कि तुलसी के समीप दीपदान करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। दीपक जलाते समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की जाती है।
  • धार्मिक मान्यताओं में तुलसी के पत्तों को पवित्र माना गया है। इसलिए इन्हें तोड़ते समय कुछ नियमों का पालन किया जाता है। कई परंपराओं में रविवार, एकादशी और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते तोड़ने से परहेज किया जाता है। पूजा के लिए तुलसी दल की आवश्यकता हो, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पहले से पत्ते तोड़कर रख सकते हैं।
  • कार्तिक मास को भगवान विष्णु की आराधना के लिए खास माना जाता है। इस दौरान तुलसी के पास बैठकर विष्णु मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ या अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रार्थना की जा सकती है। मान्यता है कि नियमित पूजा और भगवान के स्मरण से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में सकारात्मक भाव बना रहता है।
  • तुलसी पूजन के दौरान पौधे और उसके आसपास की जगह को साफ रखना भी जरूरी माना जाता है। पौधे में जरूरत के अनुसार पानी दें और दीपक ऐसी जगह रखें, जहां उसकी लौ से पत्तियों या पौधे को नुकसान न पहुंचे। पूजा करते समय श्रद्धा के साथ-साथ पौधे की देखभाल का भी ध्यान रखें।
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कार्तिक मास में तुलसी पूजा - फोटो : amar ujala
कार्तिक मास में तुलसी पूजा का क्या धार्मिक महत्व है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है। यही वजह है कि विष्णु पूजा में तुलसी दल अर्पित करने और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने की परंपरा प्रचलित है। कार्तिक मास में तुलसी पूजन, दीपदान और भगवान विष्णु के स्मरण को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने नियमित रूप से तुलसी पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। हालांकि, पूजा की विधि और नियम अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए कार्तिक मास में तुलसी पूजा करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार पूजा करना उचित है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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