kanwar yatra
समुद्र मंथन के दौरान जो विष निकल रहा था उससे पूरे संसार का नाश हो जाता। भगवान शंकर संसार की रक्षा करने के लिए खुद विष का सेवन कर लिया जिससे संसार तो बच गया,लेकिन भगवान का शरीर जलने लगा तब देवताओं ने उन पर जल डालना शुरू किया। जिसके बाद से ही कांवड़ यात्रा की शुरुआत हुई। इसके बाद शिव का नाम नीलकंठ पड़ गया था।
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