कामिका एकादशी व्रत कथा
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कामिका एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय एक क्रोधी स्वभाव का जमींदार रहता था। एक विवाद के दौरान उससे एक ब्राह्मण की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद उसे अपने कर्म पर बहुत पछतावा हुआ और वह प्रायश्चित का मार्ग खोजने लगा। उसने एक ऋषि से अपने दोष से मुक्ति का उपाय पूछा। ऋषि ने उसे कामिका एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करने की सलाह दी। जमींदार ने विधि-विधान से एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की आराधना की। कथा में वर्णित है कि भगवान श्रीहरि ने प्रसन्न होकर उसे उसके पाप से मुक्ति का आशीर्वाद दिया। इसी कारण कामिका एकादशी को प्रायश्चित, भक्ति और मोक्ष की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है।