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Jyeshtha Month 2026: कब से शुरू है ज्येष्ठ माह? इस माह में करें बस एक काम, जीवन में बढ़ेगा पुण्य

Fri, 01 May 2026 04:12 PM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

ज्येष्ठ माह 2026 कब से शुरू हो रहा है, इसका महत्व, धार्मिक मान्यताएं और सरल उपाय जानें। इस माह में स्नान, दान और जल सेवा को अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। गर्मी के इस पावन महीने में किए गए छोटे कार्य भी बड़े फल दे सकते हैं।

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ज्येष्ठ माह 2026 - फोटो : amar ujala
Jyeshtha Maah: ज्येष्ठ माह हिंदी पंचांग का तीसरा महीना माना जाता है, जिसमें गर्मी अपने चरम पर होती है और सूर्य की तपिश बेहद तीव्र हो जाती है। इस दौरान नौतपा जैसे अत्यधिक गर्मी वाले दिन भी आते हैं, जब जल और छाया का महत्व और भी बढ़ जाता है। ज्येष्ठ माह की शुरुआत ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा से होती है और इसका समापन ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा पर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में स्नान, दान, पूजा और जप-तप का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इन कार्यों से पुण्य फल की प्राप्ति मानी जाती है। कहा जाता है कि इस दौरान किए गए छोटे-से सद्कर्म भी बड़े पुण्य का कारण बन सकते हैं और जीवन के बाद के फल को भी प्रभावित करते हैं। आइए जानते हैं कि इस वर्ष ज्येष्ठ माह कब से शुरू हो रहा है और इस दौरान कौन सा सरल उपाय करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है।
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ज्येष्ठ माह कब से शुरू? - फोटो : adobe stock
ज्येष्ठ माह कब से शुरू? 
ज्येष्ठ माह की प्रतिपदा तिथि आरंभ:  1 मई, शुक्रवार, रात्रि 10: 52 मिनट पर 
ज्येष्ठ माह की प्रतिपदा तिथि समाप्त: 3 मई, रविवार, दोपहर 12: 49 मिनट पर 
उदयातिथि के आधार पर ज्येष्ठ माह का शुभारंभ 2 मई शनिवार से माना जा रहा है।
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शुभ योग और नक्षत्र - फोटो : freepik
शुभ योग और नक्षत्र 
2 मई को व्यतिपात योग प्रातःकाल से रात 9:45 बजे तक रहेगा। इसके बाद वरीयान योग का आरंभ होगा। विशाखा नक्षत्र पूरे दिन प्रभावी रहेगा, जो इस दिन के महत्व को और बढ़ाता है। ग्रह-स्थितियों की बात करें तो इस दिन चंद्रमा तुला राशि में और सूर्य मेष राशि में स्थित रहेंगे। इन ग्रह-नक्षत्रों के संयोग को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जाता है और इसे ज्येष्ठ माह के आरंभ को शुभ बनाने वाला योग बताया गया है। ज्येष्ठ माह के पहले चरण में इस वर्ष त्रिपुष्कर योग का विशेष संयोग भी बन रहा है। यह योग 3 मई को रात्रि 12:49 बजे से लेकर प्रातः 5:39 बजे तक प्रभावी रहेगा। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 3:06 बजे शुरू होगी और 30 जून को सुबह 5:26 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार पूर्णिमा 29 जून को ही मानी जाएगी, इसलिए इसी दिन ज्येष्ठ माह का समापन भी माना जाता है। 
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ज्येष्ठ माह में करें ये उपाय - फोटो : freepik.com
ज्येष्ठ माह में करें ये उपाय 
  • ज्येष्ठ माह में प्रतिदिन जल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 
  • इसके लिए आप प्यासे लोगों को पानी पिला सकते हैं या अपने घर के बाहर मिट्टी के घड़े में पानी भरकर छांव में रख सकते हैं। 
  • इसके साथ ही पक्षियों और पशुओं के लिए भी मिट्टी के बर्तन में जल भरकर रखना पुण्यकारी माना जाता है।
  • मान्यता है कि ज्येष्ठ माह में जल दान सबसे बड़ा पुण्य कार्य है, इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक फल मिलते हैं। 
  • व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ कर्मों के बंधन से मुक्ति की दिशा में भी लाभ मिलता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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