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Jivitputrika vrat 2019: जितिया व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा

Sun, 22 Sep 2019 05:21 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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jitiya 2019 - फोटो : social media
जितिया व्रत महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस व्रत को जीवित्पुत्रिका नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत विशेष तौर पर संतान के लिए किया जाता है। इस व्रत को तीन दिन तक किया जाता है। महिलाएं व्रत के दूसरे दिन और पूरी रात में जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं। यह व्रत विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार में किया जाता है। 
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jitiya 2019 - फोटो : social media
जितिया व्रत की तारीख
पंचांग के अनुसार यह व्रत अश्विन माह कृष्ण पक्ष की सप्तमी से नवमी तक किया जाता है। इस वर्ष व्रत को लेकर अलग-अलग धारणाएं बन रही हैं। बनारस पंचांग के अनुसार 22 सितंबर को व्रत रखा जाएगा, वहीं विश्वविद्यालय पंचांग के अनुसार 21 सितंबर को व्रत रखा जाएगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्रत का समय 21 से 23 सितंबर तक है और व्रत का श्रेष्ठ दिन अष्टमी 22 सितंबर का है।
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jitiya 2019 - फोटो : social media
व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त 
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 21 सितंबर 2019 को रात 08 बजकर 21 मिनट से
अष्टमी तिथि समाप्त: 22 सितंबर 2018 को रात 07 बजकर 50 मिनट तक

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jitiya 2019 - फोटो : social media
पूजा विधि 
इस व्रत में तीन दिन तक उपवास किया जाता है। पहले दिन महिलाएं स्नान करने के बाद भोजन करती हैं और फिर दिन भर कुछ नहीं खाती हैं।  व्रत का दूसरा दिन अष्टमी को पड़ता है और यही मुख्य दिन होता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत के तीसरे दिन पारण करने के बाद भोजन ग्रहण किया जाता है। 
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jitiya 2019 - फोटो : social media
व्रत-कथा 
इस व्रत की कथा महाभारत काल से संबंधित है। धार्मिक कथाओं के अनुसार महाभारत के युद्ध में अपने पिता की मौत का बदला लेने की भावना से अश्वत्थामा पांडवों के शिविर में घुस गया। शिविर के अंदर पांच लोग सो रहे थें। अश्वत्थामा ने उन्हें पांडव समझकर मार दिया, परंतु वे द्रोपदी की पांच संतानें थीं। फिर अुर्जन ने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उसकी दिव्य मणि ले ली।

अश्वत्थामा ने फिर से बदला लेने के लिए अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चें को मारने का प्रयास किया और उसने ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ को नष्ट कर दिया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा की अजन्मी संतान को फिर से जीवित कर दिया। गर्भ में मरने के बाद जीवित होने के कारण उस बच्चे का नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया। तब उस समय से ही संतान की लंबी उम्र के लिए जितिया का व्रत रखा जाने लगा। 
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