मंदिर में यह नियम बना कि किसी भी श्रद्धालु या पुजारी को तीसरी सीढ़ी पर पैर नहीं रखना चाहिए।
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तीसरी सीढ़ी पर पैर न रखने का नियम
कहते हैं कि जो भी भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन के बाद इस तीसरी सीढ़ी पर पैर रखता है उसके सारे पाप जरूर धुल जाते हैं, लेकिन उसे यमलोक अर्थात मृत्यु लोक जाना पड़ता है। इसलिए मंदिर में यह नियम बना कि किसी भी श्रद्धालु या पुजारी को तीसरी सीढ़ी पर पैर नहीं रखना चाहिए। यह नियम भक्तों की रक्षा और उनकी आत्मा की मुक्ति के लिए बनाया गया है। तीसरी सीढ़ी को यमराज से जोड़ने की यह कथा मंदिर की पवित्रता और रहस्यमयता को बढ़ाती है। इससे मंदिर में श्रद्धालुओं का विश्वास और आस्था और गहरा होती है। यह नियम केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक परंपराओं का भी हिस्सा बन गया है। हर भक्त इसे सम्मान के साथ मानता है और मंदिर के नियमों का पालन करता है।
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