क्यों तोड़ा जाता है रथ का पहिया?
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क्यों तोड़ा जाता है रथ का पहिया?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं, तब वे मां लक्ष्मी से शीघ्र लौटने का वचन देते हैं। लेकिन गुंडिचा मंदिर पहुंचने के बाद वे कई दिनों तक वहीं विराजमान रहते हैं और समय पर वापस नहीं लौटते। भगवान के लौटने में विलंब होने पर मां लक्ष्मी उनसे नाराज हो जाती हैं। वे पालकी में बैठकर गुंडिचा मंदिर तक पहुंचती हैं, लेकिन वहां भी उनकी भगवान जगन्नाथ से भेंट नहीं हो पाती। क्रोधित होकर मां लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ के पहिए को प्रतीकात्मक रूप से क्षतिग्रस्त कर देती हैं, ताकि रथ आगे न बढ़ सके।