यह रथ यात्रा में बीच में चलता है और दोनों भाइयों के बीच देवी सुभद्रा की उपस्थिति का प्रतीक है।
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देवी सुभद्रा का रथ (दर्पदलन)
- देवी सुभद्रा का रथ “दर्पदलन” कहलाता है और इसे संतुलन एवं सौम्यता का प्रतीक माना जाता है।
- इस रथ में कुल 12 पहिए होते हैं।
- इसकी ऊंचाई लगभग 43 फीट होती है।
- इस रथ को काले रंगों से सजाया जाता है, जो शक्ति और रहस्य का प्रतीक माना जाता है।
- यह रथ यात्रा में बीच में चलता है और दोनों भाइयों के बीच देवी सुभद्रा की उपस्थिति का प्रतीक है।
- तीनों रथों का निर्माण अत्यंत पवित्र विधि से किया जाता है और इसमें किसी धातु की कील का उपयोग नहीं होता।
- भक्तजन इन रथों को अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्ति भाव से खींचते हैं।
- यह संपूर्ण यात्रा आस्था, समर्पण और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है।
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