ओडिशा के पुरी में रथयात्रा की तैयारी (फाइल)
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तीनों रथ की बनावट
सबसे खास बात यह है कि इन तीनों रथों का निर्माण हर साल नए सिरे से किया जाता है, और इसमें कहीं भी लोहे की कील का इस्तेमाल नहीं होता। लकड़ी चुनने का काम अक्षय तृतीया से शुरू हो जाता है, और इसके लिए नीम व असन जैसी विशेष प्रजाति के पेड़ों की लकड़ी ही काम में ली जाती है। जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष कहलाता है, जो तीनों रथों में सबसे ऊंचा होता है और पीले-लाल रंग के वस्त्रों से सुसज्जित रहता है। बड़े भाई बलभद्र तालध्वज रथ पर विराजमान होते हैं, जिसे हरे-लाल वस्त्रों और विशेष नक्काशी से सजाया जाता है। वहीं, देवी सुभद्रा दर्पदलन रथ पर विराजमान होती हैं, जो काले-लाल रंग के वस्त्रों से अलंकृत रहता है।