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Jagannath Rath Yatra 2025: रथ यात्रा में क्यों की जाती है सोने की झाड़ू से सफाई? जानिए इसका धार्मिक महत्व

Thu, 19 Jun 2025 06:45 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jagannath Rath Yatra 2025: जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 में सोने के हत्थे वाली झाड़ू का खास महत्व है, जो यात्रा से पहले सफाई के लिए इस्तेमाल होती है। यह आयोजन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि, 27 जून को होता है।
 
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सोने की झाड़ू की परंपरा - फोटो : adobe stock
Golden Broom Rituals in Jagannath Rath Yatra: ओडिशा के पुरी में हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा पूरे देश में अपनी भव्यता और अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इस यात्रा में लाखों भक्त भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को खींचने के लिए एकत्रित होते हैं। इस दौरान कई खास रीति-रिवाज और अनुष्ठान होते हैं, जो सदियों से चलते आ रहे हैं और जो इस त्योहार को और भी ज्यादा पवित्र और मनोरम बनाते हैं।
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इन परंपराओं में से एक सबसे महत्वपूर्ण और दिलचस्प रिवाज है यात्रा से पहले किए जाने वाला सफाई का अनुष्ठान, जिसमें सोने के हत्थे वाली झाड़ू से रास्ते की सफाई की जाती है। यह झाड़ू केवल राजाओं के वंशजों के हाथों ही चलती है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि इस झाड़ू से सफाई करके भक्त अपनी भक्ति और आभार व्यक्त करते हैं और भगवान के रास्ते को पवित्र और साफ-सुथरा बनाते हैं ताकि यात्रा सफल और मंगलमय हो। यह परंपरा जगन्नाथ रथ यात्रा की खास पहचान बन चुकी है और इसके पीछे कई धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
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सोने की झाड़ू की परंपरा - फोटो : adobe stock
सोने की झाड़ू से सफाई और मंत्रोच्चारण
जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले सोने की झाड़ू से सफाई करने के बाद वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है। यह अनुष्ठान रथ यात्रा की शुरुआत का संकेत होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सोना एक पवित्र धातु है, जिसका इस्तेमाल भगवानों और देवी-देवताओं की पूजा में किया जाता है। सोने की झाड़ू से सफाई करके यात्रा के मार्ग को पवित्र किया जाता है ताकि भगवान के स्वागत के लिए रास्ता तैयार रहे। यह प्रक्रिया यह भी दर्शाती है कि भक्त अपनी तरफ से भगवान को सर्वश्रेष्ठ अर्पित करने की इच्छा रखते हैं।
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सोने की झाड़ू की परंपरा - फोटो : adobe stock
धार्मिक महत्व
सोने की झाड़ू से सफाई करने का धार्मिक कारण यह है कि सोना शुभता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इसे उपयोग में लाकर मंदिर के रास्ते को साफ करना भगवान के प्रति सम्मान और भक्ति का प्रतीक होता है। यह दर्शाता है कि भगवान के लिए हर चीज सबसे उत्तम होनी चाहिए। इसलिए यह अनुष्ठान भक्तों की श्रद्धा और समर्पण को व्यक्त करता है।

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सोने की झाड़ू की परंपरा - फोटो : adobe stock
सकारात्मक ऊर्जा और शुभता
सोने की झाड़ू से सफाई करने से उस क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। सोना सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है, इसलिए इसे लगाने से माहौल में पवित्रता और सकारात्मकता बनी रहती है। यह न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है, जो पूरे आयोजन की भव्यता और उल्लास को बढ़ाता है।
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सोने की झाड़ू की परंपरा - फोटो : adobe stock
सांस्कृतिक और राजसी महत्व
सोने की झाड़ू का इस्तेमाल जगन्नाथ रथ यात्रा की भव्यता और राजसी स्वरूप को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह रथ यात्रा के गौरव और इतिहास को भी दर्शाती है। इस अनुष्ठान को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं, जो इस त्योहार की खास पहचान बन चुका है। इस प्रकार, सोने की झाड़ू से सफाई का अनुष्ठान जगन्नाथ रथ यात्रा के पवित्र और भव्य आयोजन का एक अभिन्न हिस्सा है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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