इंदिरा एकादशी
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इंदिरा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इंदिरा एकादशी व्रत कथा का महत्व धर्मराज युद्धिष्ठर को बताया था। उनके अनुसार, सतयुग के समय की बात है। इंद्रसेन नाम का एक राजा था जिसका महिष्मति राज्य पर शासन था। राजा के राज्य में सभी प्रजा सुखी थी और राजा इंद्रसेन भगवान विष्णु के परम भक्त थे। एक बार राजा के दरबार में देवर्षि नारद पहुंचे तब राजा ने उनका स्वागत सत्कार किया और आने का कारण पूछा।
तब देवर्षि नारद ने बताया कि मैं यम से मिलने यमलोक गया था, वहां मैंने तुम्हारे पिता को देखा। वहां वह अपने पूर्व जन्म में एकादशी व्रत के खण्डित होने का दंड भोग रहे हैं। उन्हें तमाम तरह की यातनाएं झेलनी पड़ रही है। इसके लिए उन्होंने आपसे इंदिरा एकादशी का व्रत करने को कहा है ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके। तब राजा ने नारद जी से इंदिरा एकादशी व्रत के बारे में जानकारी देने को कहा। देवर्षि ने आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी व्रत की विधि के पालन के बारे में बताया, जिससे उनके पिता की आत्मा को शांति मिली और बैकुंठ की प्राप्ति हुई।