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आपकी कुंडली में हैं ये योग तो बढ़ेंगी मुश्किलें, जानें क्या है निवारण

Thu, 13 Feb 2020 12:07 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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कुंडली - फोटो : kundali
ग्रहों की युति कुंडली में योग का निर्माण करती है। ये योग सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के होते हैं। नकारात्मक योग को कुंडली दोष के नाम से भी जानते हैं। यहां हम कुंडली में ऐसे पांच योग बताने जा रहे हैं, जिनके बनने से जीवन में परेशानियां बढ़ जाती हैं। साथ ही यहां उनके ज्योतिषीय उपाय भी बताए जा रहे हैं। ये योग इस प्रकार हैं - 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
चांडाल योग
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु बृहस्पति के साथ राहु बैठा हो तो, दोनों की युति से कुंडली में चांडाल योग बनता है। चांडाल योग से व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके प्रभाव से ऋण में बढोतरी होती है। इस योग की शांति के लिए गुरु बृहस्पति की शांति के उपाय करने चाहिए। गुरुवार के दिन पीली चीजों का दान करना इस योग का एक निवारण है।
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भगवान शिव - फोटो : Pixabay
षड्यंत्र योग
लग्न भाव का स्वामी (लग्नेश) अगर अष्टम भाव में बिना किसी शुभ ग्रह के हो तो कुंडली में षड्यंत्र योग का निर्माण होता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग होता है उसकी धन-संपत्ति नष्ट होने की आशंका रहती है। इस योग के चलते कोई विपरीत लिंगी जातक इन्हें भारी मुसीबत में डाल सकता है। इस योग से बचने के लिए भगवान शिव की आराधना करें। 

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चंद्रमा - फोटो : Pixabay
केमद्रुम योग
जब कुंडली में चंद्रमा किसी भाव में अकेला बैठा हो, उसके आगे यानि दूसरे और पीछे यानि की बाहरवें स्थान पर कोई ग्रह न हो तो और न ही उस पर किसी ग्रह की दृष्टि पड़ रही हो तो इसे केमद्रुम योग कहते हैं। यह योग व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बनता है। इस योग को दूर करने के लिए चंद्रमा से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।
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Job
ग्रहण योग
किसी भी भाव में चंद्रमा के साथ राहु-केतु बैठे हों तो यह स्थिति कुंडली में ग्रहण योग बनाती है। इस योग के कारण जीवन में अस्थिरता आ जाती है। व्यक्ति नौकरी-व्यापार में अस्थिरता के कारण परेशान रहता है। इस अशुभ योग के निवारण के लिए जातकों को चंद्र ग्रह की शांति के उपाय करने चाहिए।
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kundali dosh
अल्पायु योग
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा पापी या क्रूर ग्रहों के साथ त्रिक स्थान (छठे, आठवें, बारहवें भाव) पर बैठा हो तो यह स्थिति कुंडली में अल्पायु योग का निर्माण करती है। ऐसे जातक पर सदैव मृत्यु का संकट बना रहता है। इसलिए इस दोष से बचने के लिए जातकों को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
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