फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीवन से ही नहीं हर धर्म से बहुत गहराई से है जल का संबंध, आस्था का प्रतीक है जल

Thu, 04 Mar 2021 02:48 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 5
झरना - फोटो : सोशल मीडिया
जल की महत्वता को हर मनुष्य बहुत ही अच्छी तरह से जानता है। पृथ्वी पर जीवन ही जल से है। जल के बिन जीवन की कल्पना करना भी मनुष्य के लिए नामुमकिन है। जल की महत्वता मानव जीवन में तो है ही यह आस्था का प्रतीक भी है। हर धर्म में जल की महत्वता बताई गई है। हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई चारों धर्मों में जल के महत्व को माना गया है, ताकि इसके महत्व को जानकर व्यक्ति इसे संजोकर रख सके। हर धर्म को मानने वालों की आस्था से जल बहुत ही गहराई से जुड़ा हुआ है। तो चलिए जानते हैं कि किस तरह से साधना और इबादत से जुड़ा है जल।
विज्ञापन

2 of 5
ganga jal
हिंदू धर्म में जल
सनातन परंपरा के अनुसार, पंचभूत तत्वों में से एक जल को देवता के रूप में स्वीकार किया गया है। हिंदू धर्म में गंगाजल को बहुत ही पवित्र माना गया है। गंगा नदी को माता का दर्जा दिया गया है। सनातन परंपरा में हर एक धार्मिक अनुष्ठान में गंगाजल का प्रयोग अवश्य किया जाता है। मनुष्य के जन्म से लेकर उसके जीवन के अंत तक गंगाजल व्यक्ति से जुड़ा रहता है। सनातन परंपरा में सदियों से जल आस्था का अहम हिस्सा रहा है।
विज्ञापन

3 of 5
(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पिक्साबे
सिख परंपरा में जल
सिख धर्म में भी जल के महत्व को दर्शाया गया है। सिख परंपरा में जल को अत्यंत पवित्र माना जाता है। गुरू गोबिंद जी ने जब पंज प्यारों के लिए अमृत तैयार किया था तो उसमें जल को भी महत्वपूर्ण तत्व बताया गया था। ज्यादातर गुरूद्वारों में एक पवित्र सरोवर अवश्य होता है।

4 of 5
इस्लाम (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
इस्लाम धर्म में जल
इस्लाम धर्म में आब-ए-जमजम को बहुत ही पवित्र जल माना गया है। इस्लाम में इस जल के अल्लाह की रहमत माना गया है। जब लोग हज या उमराह करने मक्का-मदीना जाते हैं तो वहां से आब-ए-जमजम का पानी जरूर लेकर आते हैं। इस पानी को बहुत ही इज्जत और पवित्रता के साथ संभालकर रखा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
सांकेतिक चित्र
ईसाई धर्म में जल
ईसाई धर्म में भी जल का बहुत महत्व माना गया है। बप्तिस्मा ईसाई धर्म का बहुत ही महत्वपूर्ण संस्कार है। बप्तिस्मा संस्कार शिशुओं के लिए किया जाता है और इसमें जल का प्रयोग किया जाता है। ईसाई धर्म में होली वॉटर को बहुत ही पवित्र माना गया है लोग गिरिजाघर में जाने पर इस जल को अपने माथे से लगाते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें