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पितरों का पावन पक्ष हुआ प्रारंभ, जानें घर में रहकर कैसे विधि-पूर्वक करें श्राद्ध कर्म

Sat, 14 Sep 2019 07:21 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क,अमर उजाला
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पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व है। वैसे तो मान्यता है इन दिनों श्राद्ध कर्म तीर्थ में करने से अधिक फल मिलता है परंतु अगर आप तीर्थ नहीं जा सकते हैं तो घर पर रहकर भी पितरों को खुश कर सकते हैं। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि पितृपक्ष में अपने पितरों के निमित्त सामर्थ्य के अनुरूप पूरी विधि से श्राद्ध करने वाले कि सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। घर-परिवार में शांति बनी रहती है। व्यवसाय और आजीविका में उन्नति होती है। हर तरह की रुकावटें खत्म हो जाती हैं।

 
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shradh - फोटो : अमर उजाला
घर पर इस तरह करे श्राद्ध कर्म-
- श्राद्ध तिथि पर दिन तक श्राद्ध कर्म कर लेना चाहिए।
- सुबह स्नान के बाद घर की सफाई करें। गंगाजल और गौमूत्र को पुरे घर में छिड़के।
 
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दक्षिण दिशा कि तरफ मुंह करे और बांए पैर को मोड़कर कर बैठ जाएं। इसके बाद तांबे के बर्तन में तिल, दूध, गंगाजल और पानी रखे। उस जल को हाथों में भरकर सीधे हाथ के अंगूठे से उसी बर्तन में गिरा दे । पितरों का ध्यान करते हुए ऐसा लगतार 11 बार करें। ं

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shradh - फोटो : सोशल मीडिया
घर के आंगन में रंगोली बनाने कि प्रथा भी है । महिलाएं पितरों के लिए भोजन बनाएं। ब्राह्मण को न्यौता देकर बुलाएं। निमंत्रित ब्राह्मण के पैर धोकर उन्हें भोजन करवाएं और इस समय पर पत्नी को दाहिनी तरफ होना चाहिए।
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पितरों के निमित्त बनी खीर को अग्नि में अर्पण करें। ब्राह्मण भोज से पहले गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए भोजन सामग्री निकाल ले।
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shradh - फोटो : अमर उजाला
दक्षिण दिशा कि तरफ मुंह रखकर  कुश, जौ, तिल, चावल और जल लेकर संकल्प ले और श्रद्धानुसार एक या तीन ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
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श्राद्ध
भोजन प्रसन्न होकर परोसें। भोजन के उपरांत सामग्री दान करें जिसमें तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी तथा नमक प्रमुख है। ब्राह्मण वैदिक पाठ करें और गृहस्थ एवं पितर के प्रति शुभकामनाएं दें। श्राद्ध कर्म में फूलों का उपयोग करें। 
श्राद्ध कर्म में  दूध, गंगाजल, शहद, सफेद कपड़े, अभिजित मुहूर्त और तिल मुख्य रूप से महत्वपूर्ण है।
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