शनि के प्रकोप से सभी भली भांति अवगत है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि को न्याय का देवता माना जाता है। हिन्दू पौराणिक कथाओं मे इस बात का भी वर्णन है की सदाशिव भोले शंकर शनि देव के गुरु हैं।
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हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि सूर्य देव और देवी छाया के पुत्र हैं।
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कथाओं मे इस बात का वर्णन है की शनि देव बचपन से ही काफी शैतान थे वो किसी की भी बात नहीं सुना करते थे। उनके पिता सूर्य देव उनकी इन आदतों से काफी परेशान रहते थे।
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एक बार सूर्य देव इन सब से चिंतित होकर भगवान भोले शंकर के पास चले गए और उनसे अपने पुत्र शनि को सही मार्ग बताने का आग्रह करने लगे।
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शिव मान गए और शिव ने शनि देव को समझाया परन्तु शनि किसी भी कहा सुनने को तैयार थे शनि ने शिवजी की बातों को अनसुनी कर दी।
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शनि के इस तरह के व्यवहार से शिव जी भी काफी व्याकुल हो गए, तब शिव ने शनि को सबक सिखाने के लिए शनि पर प्रहार किया और उस प्रहार से शनि मूर्छित हो गए।
सूर्य देव के कहने पर फिर शिव ने शनि की मूर्छा दूर कर दी और शनि को अपना शिष्य बना लिया। इसके बाद शनि को आशीर्वाद भी दिया कि आज से वो दंडाधिकारी भी होंगे और न्यायाधीस समान न्याय और दंड के कार्यो में भगवान शिव का सहयोग करेंगे। इस तरह शिव के आशीर्वाद से शनि बन गए न्याय के देवता।