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Holika Dahan Shubh Muhurat 2026: कब है होलिका दहन? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक महत्व

Fri, 27 Feb 2026 10:36 AM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Holika Dahan: इस वर्ष होलिका दहन की तिथि को लेकर पंचांग और चंद्र ग्रहण के कारण भ्रम बना हुआ है। फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि होने पर ही होलिका दहन किया जाता है। इस आधार पर होलिका दहन 2 मार्च को मनाया जाएगा।
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Holika Dahan Puja VIdhi - फोटो : amar ujala
Holika Dahan 2026: इस बार होलिका दहन की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पंचांग की तिथियों में अंतर और उसी समय पड़ रहे चंद्र ग्रहण की वजह से कई लोगों के मन में संशय बना हुआ है कि इस बार होलिका दहन 2 मार्च को होगा या 3 मार्च को। हिंदू पंचांग के मुताबिक फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 5:07 बजे तक रहेगी। इसी आधार पर इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च को मनाया जाएगा।
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Holika Dahan 2026 - फोटो : Adobe Stock
होलिका दहन की पूजन विधि 
  • होलिका दहन के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें और मन में भगवान से प्रार्थना करें कि यह पूजा परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए हो।
  • जिस स्थान पर होलिका दहन किया जाना है, उसे पहले साफ-सुथरा कर लें और वहां लकड़ियां, उपले आदि सजाकर होलिका की व्यवस्था करें।
  • पूजन के लिए रोली, अक्षत, फूल, माला, नारियल, कच्चा सूत, हल्दी, गुलाल, गेहूं की बालियां, जौ, चने, गोबर के उपले और जल आदि सामग्री एकत्र करें।
  • कई स्थानों पर होलिका और भक्त प्रह्लाद का प्रतीक रूप भी स्थापित किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान नरसिंह का स्मरण किया जाता है, क्योंकि वे भक्त प्रह्लाद के रक्षक माने जाते हैं।
  • शुभ मुहूर्त में होलिका की विधिवत पूजा करें।
  • कच्चा सूत होलिका के चारों ओर लपेटें, रोली-अक्षत अर्पित करें और जल चढ़ाएं।
  • इसके बाद होलिका में अग्नि प्रज्वलित करें।
  • अग्नि प्रज्वलित होने के बाद पूरे परिवार के साथ होलिका की तीन या सात परिक्रमा करें।
  • परिक्रमा करते समय गेहूं, जौ और चने की बालियां अग्नि में अर्पित करें। इसे नई फसल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  • होलिका की ज्वाला शांत होने के बाद उसकी राख को शुभ माना जाता है।
  • लोग इस राख को घर लाकर तिलक के रूप में लगाते हैं या घर में सुरक्षित स्थान पर रखते हैं। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता आती है।
  • यदि घर में वास्तु दोष हो तो थोड़ी-सी राख आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) में रखने से लाभ मिलता है।
  • परंपरा के अनुसार होलिका दहन की ज्वाला के दर्शन करने के बाद ही भोजन करना शुभ माना जाता है।
 
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holika dahan 2026 - फोटो : amar ujala
होलिका दहन के दिन क्या करें?
  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शुभ संकल्प लें।
  • शुभ मुहूर्त में होलिका दहन की विधि-विधान से पूजा करें।
  • बच्चों को उत्साहित रखें और उन्हें साहस व सकारात्मकता का संदेश दें।
  • घर में पारंपरिक पकवान जैसे पूड़ी, खीर, मालपुआ, हलवा और कचौड़ी बनाएं।
  • पूरे परिवार के साथ मिलकर प्रसाद और भोजन ग्रहण करें।
  • इस दिन हनुमानजी की पूजा करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
  • शाम के समय परिवार सहित चंद्रमा के दर्शन करें।
  • होलिका दहन की अग्नि के दर्शन के बाद ही भोजन करें, इसे शुभ माना जाता है।

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Holika Dahan 2026 - फोटो : Adobe Stock
होलिका दहन के मंत्र
होलिका दहन के समय मंत्रोच्चारण का विशेष महत्व होता है। अलग-अलग परंपराओं में मंत्र भिन्न हो सकते हैं, लेकिन सामान्य रूप से यह मंत्र बोला जाता है—

अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:।
अतस्त्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्।।


इसी प्रकार होली की भस्म शरीर पर लगाते समय यह मंत्र बोला जाता है—
वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।

मंत्र जप के साथ की गई पूजा को अधिक फलदायी माना जाता है।
 
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Holika Dahan 2026 - फोटो : Adobe Stock
होलिका दहन का धार्मिक महत्व
होलिका दहन की परंपरा भक्त प्रह्लाद और उनके पिता हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ी है। हिरण्यकश्यप एक असुर राजा था, जो स्वयं को भगवान से भी श्रेष्ठ मानता था, जबकि उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता ने कई बार प्रह्लाद को विष्णु भक्ति छोड़ने के लिए मजबूर किया, लेकिन वह अपने मार्ग से नहीं डिगा। क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता ली, जिसे वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती। योजना के तहत होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे और होलिका स्वयं जलकर भस्म हो गई। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि सत्य और भक्ति की हमेशा विजय होती है, जबकि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है। 



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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