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Chaitra Navratri 2020: चैत्र नवरात्रि से शुरू होगा हिंदू नववर्ष 2077, जानें 10 बड़ी बातें

Sat, 21 Mar 2020 08:31 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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हिंदू नववर्ष चैत्र नवरात्रि
25 मार्च से नया संवत्सर 2077 आरंभ होने वाला है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नया हिंदू वर्ष शुरू हो जाता है। साथ ही इसी तिथि पर नवरात्रि का पहला दिन होता है। हिंदू परंपरा में नव संवत्सर को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं हिंदू नववर्ष  की प्रमुख बातें....
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chaitra navratri 2020
सभी तरह के नववर्ष में सिर्फ भारतीय नव संवत्सर ही है जिसकी गणना ग्रहों, नक्षत्रों, चांद, सूरज आदि की गति का अध्ययन कर 6 ऋतुओं और 12 महीनों का एक साल होता है।
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navratri 2020
सूर्य-चंद्र और ग्रह-नक्षत्रों  पर आधारित हिंदू महीनों का नाम रखा गया है। जैसे- चित्रा नक्षत्र के आधार पर चैत्र, विशाखा के आधार पर बैसाख, ज्येष्ठा के आधार पर ज्येष्ठ, उत्तराषाढ़ा पर आषाढ़, श्रवण के आधार पर श्रावण आदि।

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navratri
हिंदू पंचांग की गणना के आधार पर यह हजारों साल पहले बता दिया था कि अमुक दिन, अमुक समय पर सूर्यग्रहण होगा। युगों बाद भी यह गणना सही और सटीक साबित हो रही है।
 
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solar eclipse
तिथि घटे या बढ़े, लेकिन सूर्यग्रहण सदैव अमावस्या को होगा और चंद्रग्रहण पूर्णिमा को ही होगा। इस आधार पर दिन-रात, सप्ताह, पखवाड़ा, महीने, साल और ऋतुओं का निर्धारण हुआ।
 
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सौरमंडल के ग्रह - फोटो : Pixabay
वैदिक परंपर में 12 महीनों और 6 ऋतुओं के चक्र यानी पूरे वर्ष की अवधि को संवत्सर नाम दिया गया। 
 
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नवरात्रि - फोटो : social media
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की तिथि को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। ब्रह्मपुराण में उल्लेख है कि चैत्र प्रतिपदा को ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। जिस दिन दुनिया अस्तित्व में आई, उसी दिन प्रतिपदा मानी गई।
 

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चैत्र नवरात्रि 2020
वैदिक गणना का आधार सूर्य के स्थान पर चंद्रमा को बनाया गया। आज भी ग्रामीण इलाकों में लोग रात के चंद्रमा की गति देखकर समय व तिथि का अनुमान सहज ही लेते हैं। 
 

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panchang
विक्रम संवत् भारतवर्ष के सम्राट विक्रमादित्य ने शुरू किया था।
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navratri - फोटो : navratri
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के जिस दिन (वार) से विक्रमी संवत शुरू होता है, वही इस संवत का राजा होता है। सूर्य जब मेष राशि में प्रवेश करता है, तो वह संवत का मंत्री होता है। विक्रम संवत समस्त संस्कारों, पर्वों एवं त्योहारों की रीढ़ माना जाता है। समस्त शुभ कार्य इसी पंचांग की तिथि से ही किए जाते हैं।
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