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Hindu New Year 2021: हिन्दू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होगा शुरू, जानें इस तिथि का महत्व

Sun, 11 Apr 2021 06:49 PM IST
रुस्तम राणा पंडित राजीव नारायण शर्मा

सार

संवत्सर का अर्थ है, सम+वत्सर यानि पूर्ण वर्ष। शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्माजी ने इस दिन सम्पूर्ण सृष्टि और लोकों का सृजन किया था। इसी दिन भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार भी हुआ था। हिंदू शास्त्रों के अनुसार नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होता है।
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hindu new year 2021 - फोटो : अमर उजाला
संवत्सर का अर्थ है, सम+वत्सर यानि पूर्ण वर्ष। शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्माजी ने इस दिन सम्पूर्ण सृष्टि और लोकों का सृजन किया था। इसी दिन भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार भी हुआ था। हिंदू शास्त्रों के अनुसार नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होता है।
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संवत के होते हैं पांच भेद
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संवत के 5 भेद होते हैं, सौर, सावन, चंद्र, बार्हस्पत्य और नक्षत्र। एक संवत में 12 मास होते हैं, चैत्र से फाल्गुन तक इनका क्रम निश्चित है। एक संवत में 6 ऋतुएं होती हैं। कुल 60 संवत होते हैं, इनका प्रारम्भ प्रभव से होता है और अंत अक्षय पर। अलग-अलग धर्म संप्रदायों के अनुसार संवत्सर होते हैं, जैसे शक संवत (प्रतिवर्ष 22 मार्च से, इसे अब राष्ट्रीय संवत भी कहते हैं), बंगला संवत, हिजरी संवत। ईसाई धर्म के लोग ईसवी सन् मनाते हैं, जो जनवरी से दिसंबर तक रहता है।
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हिंदू नववर्ष 2078 - फोटो : सोशल मीडिया
विक्रमी संवत
भारत में विक्रमी संवत, जिसे उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने 2000 वर्ष पूर्व शुरू किया, जो चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से शुरू होता है। इसे सभी सनातन धर्म के मानने वाले नव वर्ष के रूप में मनाते हैं। इसे गुड़ी पड़वा भी कहते हैं। इसी दिन से नया पंचाग शुरू होता है, और ज्योतिष की गणना के अनुसार देश, राज्य के समस्त विषयों की भविष्यवाणी, लोक व्यवहार, विवाह, अन्य संस्कारों और धार्मिक अनुष्ठानों की तिथियां निर्धारित की जाती हैं। 

प्रकृति में दिखाई देती है नवीनता
भगवान राम, युधिष्ठिर का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ था। इसी दिन प्रकृति भी हमें बदलाव के संकेत वृक्षों पर पतझड़ के बाद नए पत्ते आने के साथ देती है, चारों तरफ अनेक प्रकार के फूल खिलते हैं, ऐसा लगता है मानो हरियाली भी नव वर्ष मना रही है। फसल पकने के बाद नया अनाज बाजार में आता है। शक्ति, और भक्ति के प्रतीक नवरात्रि इसी दिन से प्रारंभ होते हैं, सम्पूर्ण वातावरण आनंदमय और आध्यात्मिक प्रतीत होता है।
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ब्रह्मा जी - फोटो : pinterest
संवत्सर पूजन
इस दिन गणेशजी, ब्रह्माजी, सृष्टि के प्रधान देवी देवताओं, यक्ष, गंधर्व, ऋषि मुनियों, पंचाग, ज्योतिषियों, ब्राह्मण, वेद पुराण, धर्म शास्त्र, न्याय शास्त्र, प्रकृति, औषधियों इत्यादि की पूजा की जाती है। प्रत्येक घर पर लोग अपने अपने संप्रदायों के अनुसार ध्वज आदि लगाते हैं, घरों को सजाते हैं, वस्त्र आभूषण आदि पहनकर उत्सव के रूप में मनाते हैं। पूजन के समय, घट स्थापना के पश्चात नवीन पंचांग से वर्ष के राजा, मंत्री, सेनाध्यक्ष, धनेश, धान्यादि, मेघेश, संवत्सर निवास आदि की गणना की जाती है।
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नव संवत्सर 2078 
नव संवत 2078 12 अप्रैल 2021 को सुबह 8.01 मिनट से शुरू हो रहा है। इसका नाम "राक्षस" है। इस वर्ष का राजा, मंत्री, मेघेश मंगल है।
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