सुंदरकांड रामचरितमानस का पांचवां अध्याय है।
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सुंदरकांड क्या है?
सुंदरकांड रामचरितमानस का पांचवां अध्याय है। इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास ने 16वीं शताब्दी में की थी। यह एकमात्र ऐसा खंड है जो पूरी तरह से हनुमान जी को समर्पित है। सुंदरकांड में हनुमान जी द्वारा माता सीता की खोज, सुरसा राक्षसी को पराजित करना, लंका प्रवेश, अशोक वाटिका नष्ट करना और लंका दहन जैसे प्रमुख उद्धरण मिलते हैं। प्रत्येक घटना आध्यात्मिक रूप से प्रासंगिक और अत्यंत शक्तिशाली है, इसीलिए सुंदरकांड को एक प्रमुख योग शास्त्र भी माना जाता है।